पीलीभीत। जनपद में मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के अंतर्गत गांधी स्टेडियम में रेशम मेला आयोजित किया गया। इस अवसर पर ब्लाक प्रमुख ललौरीखेड़ा अजय गंगवार और जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र कुमार श्रीवास के साथ मिलकर रेशम प्रदर्शनी का फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
रेशम मेले में एनआरएलएम, पशुपालन, गन्ना विभाग, कृषि विभाग, इफको विभाग, नेडा विभाग, प्रोवेश विभाग, मत्स्य विभाग, महिला कल्याण विभाग, रेशम विभाग, लघु सिंचाई विभाग सहित लगभग 15 विभागों ने स्टॉल लगाए। प्रत्येक विभाग ने अपने स्टॉल के माध्यम से किसानों को संचालित योजनाओं, सब्सिडी और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी दी। रेशम विभाग ने लाइव प्रदर्शन के माध्यम से रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया।मेला में जनपद के विभिन्न ब्लॉकों से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जिलाधिकारी ने बताया कि रेशम उत्पादन में शहतूत के पेड़ का उपयोग किया जाता है। इस पेड़ की पत्तियों को कीट खाते हैं, और इसके बाद वे कोकून बनाते हैं, जिससे रेशम प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन में योगदान बहुत कम है। इसलिए इस योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों और स्वयं सहायता समूहों को इस कार्य से जोड़कर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इसके साथ ही सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, सब्सिडी और आवश्यक संसाधनों जैसे शहतूत के पौधे और कीट के बारे में भी जानकारी प्रदान की। विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित किसानों को अपने-अपने विभाग की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी देते नजर आए। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक राममिलन सिंह परिहार, डीडीएम नाबार्ड सीपी त्रिवेदी, अग्रणी जिला प्रबंधक राजकुमार सेठ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वी.के. गौतम, मत्स्य अधिकारी अनुराग तिवारी, उपायुक्त स्वतः रोजगार वन्दना सिंह, डीपीओ एएस रस्तोगी, आरएल मौर्य सेवा सहायक निदेशक रेशम लखनऊ, दयाशंकर सिंह सहायक निदेशक रेशम, अजय कुमार सिंह रेशम विकास अधिकारी, प्रमोद कुमार रेशम विकास अधिकारी, दीक्षा चैहान आशुलिपिक, गुलरेज अंसारी रेशम अधिकारी, प्रेमपाल सिंह एवं राजेश चैहान प्रदर्शक, शैलेन्द्र कुमार, दिलीप कुमार, अनिल कुमार और विपिन कुमार फार्म प्रभारी उपस्थित रहे। मेले का उद्देश्य न केवल रेशम उत्पादन को बढ़ावा देना, बल्कि किसानों और स्वयं सहायता समूहों को संबंधित योजनाओं की जानकारी देना और उनके मार्गदर्शन में योगदान देना बताया गया।
