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पीलीभीतः समाज जब धर्म और संस्कृति के मार्ग पर चलता है, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है- श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज


पीलीभीत। 128 बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने गुजरात के गांधीनगर में पंचायती निर्मल अखाड़ा की आदरणीय साध्वी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. गीता श्री हरि जी के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने संत समाज के साथ दीप प्रज्वलन कर प्रभु का स्मरण किया और साध्वी जी को जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में देशभर से अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य जगद्गुरु अविचल देवाचार्य जी महाराज, प्रभु जगन्नाथ मंदिर अहमदाबाद के महंत पूज्य जगद्गुरु दिलीप दास आचार्य जी महाराज, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी राजेंद्रनंद गिरी जी महाराज, पंचायती निर्मल अखाड़ा के कोठारी जसविंदर सिंह जी, महंत गुरविंदर सिंह जी, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी मोहनदास जी महाराज, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर दयालपुरी जी महाराज, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर अवधकिशोर जी महाराज, तथा महामंडलेश्वर गोविंद जी महाराज सहित अनेक संतजन उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ, समाज को धर्म और संस्कृति की ओर किया मार्गदर्शन समारोह का आरंभ स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने संतजनों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए मार्गदर्शन करता रहा है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि वे धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करें। स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और संतजनों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता, सेवा और सद्भाव का संदेश देता है। समाज जब धर्म और संस्कृति के मार्ग पर चलता है, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य जगद्गुरु अविचल देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि संत समाज का दायित्व केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना ही नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और सदाचार को स्थापित करना भी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में संतों की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं, क्योंकि इनके माध्यम से समाज को सही दिशा मिलती है।

प्रभु जगन्नाथ मंदिर अहमदाबाद के महंत पूज्य जगद्गुरु दिलीप दास आचार्य जी महाराज ने भारत की संस्कृति की विशिष्टता को उजागर करते हुए कहा कि इसकी मूल भावना सेवा, त्याग और समर्पण में निहित है। संत समाज हमेशा मानवता, करुणा और भाईचारे का संदेश देता आया है और यही संदेश समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी राजेंद्रनंद गिरी जी महाराज ने कहा कि समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। जब समाज धर्म और संस्कृति के मूल सिद्धांतों से जुड़ा रहेगा, तब तक समाज में शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

इस अवसर पर आसपास के क्षेत्रों से आए बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें भारतीय संस्कृति और संस्कारों का संदेश झलकता था। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और समारोह में विशेष भव्यता का अनुभव कराया।

कार्यक्रम के समापन पर सभी संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रभु का प्रसाद ग्रहण किया और पूरे विश्व में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उपस्थित संतजन और श्रद्धालु इस अवसर से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत प्रेरित हुए।

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