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संग्रामपुरः मिशन शक्ति या मिशन वसूली ? ! महिला मरीजों ने भी खोली सीएचसी के भ्रष्टाचार की पोल


संग्रामपुर/अमेठी। एक ओर सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने का दम भरती है, वहीं दूसरी ओर संग्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात चिकित्सकों का एक वर्ग इसे श्मुनाफा वसूलीश् का जरिया बना चुका है। अस्पताल से मुफ्त दवाएं मिलने के बजाय, मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख कर सीधे मेडिकल स्टोरों के दलाल के रूप में काम किया जा रहा है। अस्पताल आने वाले गरीब मरीजों की शिकायत है कि उन्हें डॉक्टर के चैंबर से मिलने वाली मुफ्त दवाओं की पर्ची के बजाय, सफेद कागज पर बाहर की दवाएं लिख कर दी जाती हैं। ये दवाएं अस्पताल के आसपास के चुनिंदा मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच एक अवैध सांठगांठ चल रही है।निर्मला (मरीज) अस्पताल में लाइन लगाने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा। डॉक्टर ने पर्चे पर बाहर की दवाएं लिखकर दे दीं।  रिम्पी के परिजन खांसी जैसी मामूली बीमारी के लिए भी हमें सरकारी अस्पताल के बजाय बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। जब बाहर ही जाना था, तो सरकारी पर्चा बनवाने का क्या मतलब? मोहम्मद जफर गले की समस्या लेकर पहुंचा था, लेकिन डॉक्टर ने सरकारी दवा देने के बजाय बाहर से दवा लाने को कह दिया। गरीब आदमी अपनी मेहनत की कमाई दवाओं में फूँक दे रहा है।जब इस मामले में सीएचसी प्रभारी डॉ. संतोष सिंह से बात की गई, तो उनका तर्क था कि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि कोई दवा स्टॉक में नहीं है तो जनऔषधि केंद्र जाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, सवाल यह है कि यदि दवाएं उपलब्ध हैं, तो मरीजों को बाहर क्यों भेजा जा रहा है? जांच के आश्वासन तो दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

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