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अमेठीः क्या अब नसीब में केवल पलायन ही लिखा है? संस्थानों का आना बंद और जाना शुरू


अमेठी। जनपद के उन हजारों युवाओं के लिए एक अत्यंत निराशाजनक और विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जो भारतीय सेना की वर्दी पहनने का स्वप्न संजोकर प्रतिदिन भोर में मैदानों की खाक छानते हैं। वर्षों से अमेठी की सैन्य पहचान रहे सेना भर्ती कार्यालय (एआरओ) को अब यहाँ से समेटकर अयोध्या स्थानांतरित करने का आधिकारिक फरमान जारी हो चुका है। 10 मार्च 2026 को निर्गत एक पत्र के अनुसार, आगामी अप्रैल माह के प्रथम या द्वितीय सप्ताह तक यह कार्यालय पूरी तरह अमेठी से विदा होकर रामनगरी अयोध्या में स्थापित हो जाएगा। इस स्थानांतरण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में जिस भवन में एआरओ संचालित हो रहा है, उसे रिक्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। संबंधित विभाग ने भवन स्वामियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मांग की है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि अमेठी से इस महत्वपूर्ण कार्यालय का अस्तित्व अब समाप्त होने जा रहा है। अमेठी जैसे वीआईपी जिले से इस कार्यालय का जाना केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह यहाँ के युवाओं के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। अब तक अमेठी के अभ्यर्थी अपने ही जिले में सुगमता से भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लेते थे, लेकिन अब उन्हें अयोध्या के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इससे गरीब परिवारों के युवाओं पर यात्रा और ठहरने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।भर्ती रैलियों और सूचनाओं के लिए दूसरे जिले की शरण लेने से अभ्यर्थियों का कीमती समय नष्ट होगा, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित होना निश्चित है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और पूर्व सैनिकों का कहना है कि एक ओर सरकार युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रोत्साहित करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर स्थापित सुविधाओं को छीनकर उनकी राहें और कठिन बनाई जा रही हैं। जिले के युवाओं में इस फैसले को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का सवाल है कि क्या अमेठी के विकास का अर्थ यहाँ से संस्थानों का पलायन है? जैसे-जैसे कार्यालय के शिफ्ट होने की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या जिले के रसूखदार नेता इस पलायन को रोकने के लिए शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों के समक्ष कोई प्रभावी पैरवी करेंगे? संस्थानों का निर्माण वर्षों की मेहनत से होता है, लेकिन एक आदेश उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए काफी है। अमेठी से एआरओ का जाना यहां के युवाओं के मनोबल को तोड़ने जैसा है।

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