पीलीभीत। जनपद में जमीन कब्जे और दबंगई का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक 60 वर्षीय वृद्ध महिला ने पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सहित उनके परिवार पर धोखाधड़ी, मारपीट, धमकी और जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। पीड़िता नन्द रानी देवी पत्नी स्व. लालता प्रसाद, निवासी ग्राम पथरिया, ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।पीड़िता के अनुसार, उसकी 0.089 हेक्टेयर भूमि मिश्रा कॉलोनी, ग्राम भिंडारा, निकट मझोला नगर में स्थित है। इस भूमि का सौदा वर्ष 2017 में संजीव प्रताप सिंह, उनकी पत्नी भावना सिंह, भाई निशांत प्रताप सिंह (वर्तमान चेयरमैन मझोला) और राजीव प्रताप सिंह के साथ 5,69,000 रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि इसके एवज में 5 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि 69 हजार रुपये नकद देने की बात कही गई।वृद्धा का कहना है कि रजिस्ट्री के बाद जब वह चेक बैंक में लगाने लगी, तो आरोपियों ने लगातार बहाने बनाकर उसे टालते रहे। बाद में राजीव प्रताप सिंह ने चेक यह कहकर वापस ले लिया कि उसकी तारीख बढ़ाकर दे दी जाएगी, लेकिन वह चेक कभी वापस नहीं किया गया और कथित रूप से फाड़ दिया गया। बैंक जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित खाते में इतनी धनराशि कभी थी ही नहीं।
धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़िता ने सिविल कोर्ट में वाद दायर किया, लेकिन आरोप है कि विपक्षियों ने फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर भुगतान की नकली रसीदें न्यायालय में प्रस्तुत कर दीं। पीड़िता का आरोप है कि अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए संजीव प्रताप सिंह ने उसके पति और पुत्र को कई बार पुलिस से उठवाया, उनके साथ मारपीट करवाई और समझौते का दबाव बनाया।घटना का एक और गंभीर पहलू सामने आया है, जिसमें 12 अगस्त 2020 की रात आरोपियों द्वारा कथित रूप से पुलिस वर्दी में लोगों को साथ लाकर पीड़िता के घर में घुसकर मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। पीड़िता का कहना है कि इस घटना के बाद वह आज तक ठीक से चल नहीं पाती है। इसके अलावा बिजली कनेक्शन कटवाने और झूठे मुकदमे दर्ज कराने के भी आरोप लगाए गए हैं।हाल ही में 25 मार्च को भी आरोपियों द्वारा गुर्गों के जरिए प्लॉट पर जबरन मिट्टी डालकर कब्जा करने का प्रयास किया गया, जिसे पीड़िता ने 112 नंबर पर कॉल कर रुकवाया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी अन्य स्थानों पर भी अवैध कब्जे और कॉलोनियां विकसित कर चुके हैं।
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहकारी समिति का पद भी हासिल किया और अन्य राज्यों में सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाया।
पीड़िता का कहना है कि लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न के कारण उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है, यहां तक कि उसका घर भी बिक गया और उसके पुत्र की पढ़ाई तक छूट गई।अब जब आरोपी अपने राजनीतिक पद से हट चुके हैं, तो पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मामले में एफआईआर दर्ज कराने, फर्जी हस्ताक्षरों की जांच हस्तलेख विशेषज्ञ से कराने, जमीन पर कब्जे को रोकने और परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।इस मामले ने जिले में कानून व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर आरोपों वाले प्रकरण में क्या कार्रवाई करता है।
