कुंडा/प्रतापगढ।कुंडा तहसील क्षेत्र में सोमवार की भोर शारदा सहायक नहर टूटने से सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। नहर का पानी खेतों में घुस जाने से करीब 300 बीघा में लगी आलू, प्याज, गेहूं, सरसों और धनिया की फसल जलमग्न हो गई। अचानक आई इस आपदा से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कुंडा तहसील के सिलावटपुर गांव के पास सोमवार की भोर करीब 3 बजे शारदा सहायक नहर अचानक टूट गई। नहर का तेज बहाव आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे देखते ही देखते सैकड़ों बीघा खेत पानी में डूब गए। खेतों में लगी आलू, प्याज, गेहूं, सरसों और धनिया की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई।
सुबह करीब 4 बजे सिलावटपुर गांव निवासी कुलदीप सरोज शौच के लिए खेतों की ओर गया था। उसी दौरान उसकी नजर टूटी हुई नहर पर पड़ी। उसने तत्काल ग्रामीणों को सूचना दी, जिसके बाद गांव में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और जेसीबी मशीन की मदद से नहर को बांधने की कोशिश शुरू की गई। कड़ी मशक्कत के बाद करीब दोपहर 2 बजे नहर को अस्थायी रूप से बांधने में सफलता मिली, तब तक सैकड़ों बीघा खेतों में पानी भर चुका था।
नहर टूटने से देवरपट्टी, कजियाना सहित आसपास के कई गांवों के किसानों की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी महीनों की मेहनत एक ही झटके में बर्बाद हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम कुंडा वाचस्पति सिंह भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने नुकसान का आकलन कराने और किसानों को राहत दिलाने का आश्वासन दिया है।
नहर टूटने से हुए भारी नुकसान को लेकर किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि समय पर नहरों की मरम्मत और देखरेख नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
