हाथरस। जिलाधिकारी अतुल वत्स को प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर तहसील सासनी में अबैध रूप से संचालित नकली खाद फैक्ट्री के संबंध में दिये गये निर्देशो के अनुपालन में उप जिलाधिकारी सासनी तथा प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट ने जिला कृषि अधिकारी और पुलिस बल के साथ मौके पर छापामारी की और प्रारंभिक जांच में अवैध गतिविधि पाये जाने पर परिसर में स्थित उर्वरक को तत्काल अधिग्रहित कर सुपुर्दगी में दिया गया।
छापेमारी के दौरान एक परिसर से भारी मात्रा में अनुदानित उर्वरक- डीएपी 5 कु0, पोटाश 18.50 कु0, एनपीकेएस 48 कु0, टेक्निकल ग्रेड यूरिया 122.50 कु0 अनमार्का बैग भरे हुए 52.50 कु0 कुल 246.50 कु. तथा उर्वरक के खाली लगभग 1500 पैकेट अधिग्रहित किए गए, जिनकी बाजर मूल्य लगभग रू. 863000 है। मौके पर परिसर संचालक द्वारा उर्वरक भण्डारण के सम्बन्ध में कोई भी वैध प्रपत्र प्रस्तुत नहीं किये गये। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सरकारी खाद को कच्चे माल के रूप में प्रयोग कर उस में केमिकल मिला कर उसे बोरियों में भरकर बाजार में औद्योगिक उपयोग हेतु बेचा जा रहा था। इससे किसानों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा रही थी। अधिग्रहित खाद से 04 नमूने ग्रहित किये गये हैं, जिन्हें प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
जिलाधिकारी अतुल वत्स एवं मुख्य विकास अधिकारी के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे प्रकरण की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि यह एक गंभीर आर्थिक एवं प्रशासनिक अपराध है, जिसमें संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि सरकारी सब्सिडी वाली खाद किसानों के लिए होती है, उसका इस प्रकार औद्योगिक उपयोग के लिए दुरुपयोग अत्यंत गंभीर विषय है। यह भी जांच का विषय है कि सरकारी खाद अवैध कारोबारियो तक कैसे पहुंची। इस संबंध में आपूर्ति श्रृंखला की भी गहन जांच की जा रही है। छापेमारी से पूर्व एक ट्रक माल मौके से निकल चुका था, जिसे ट्रैक किया जा रहा है। संबंधित वाहन एवं नेटवर्क की पहचान कर पूरे संगठित गिरोह तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं। उर्वरक के अवैध भण्डारण करने के कारण उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3ध्7 के तहत विघिक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अवैध खाद कारोबार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता नीति के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
