प्रतापगढ़। यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के बीच प्रतापगढ़ से सवर्ण समाज की मुखर आवाज बृजेश तिवारी सेवादार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री माननीय धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर तीखी और तथ्यपरक प्रतिक्रिया दी है।
बृजेश तिवारी सेवादार ने कहा कि“सिर्फ मौखिक रूप से यह कह देना कि भेदभाव नहीं होगा, सवर्ण समाज को बहलाने की कोशिश है। सवर्ण समाज पहले भी भेदभाव झेल चुका है और आज भी झेल रहा है।”उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा “जब ैब् और ैज् वर्ग को खुश करने के लिए 22 अपराधों वाले कानून को बढ़ाकर 47 अपराध कर दिया गया, तब क्या सवर्ण समाज दिखाई नहीं देता था? उस समय प्रधानमंत्री जी डंके की चोट पर मंचों से भाषण देते हैं, लेकिन सवर्ण समाज की पीड़ा पर चुप्पी क्यों?”बृजेश तिवारी सेवादार ने आगे कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान कि ‘कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता’ जमीनी सच्चाई को और भयावह बना देता है।
उन्होंने सवाल उठाया “जब आरक्षण खत्म नहीं होना है, तो क्या सवर्ण समाज पर आर्थिक और शैक्षणिक बोझ डालना न्याय है? स्कूलों, कॉलेजों में सवर्ण छात्रों से चार गुना फीस ली जा रही है, हर आवेदन में सवर्ण वर्ग से चार गुना अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।”
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा “आज व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि माइनस 40 अंक पाने वाला ैब्ध्ैज् आरक्षण से डॉक्टर बन सकता है, और सवर्ण समाज का मेधावी छात्र सिर्फ मौखिक आश्वासनों के भरोसे रह जाए।”
बृजेश तिवारी सेवादार ने यह भी याद दिलाया कि न्ळब् के ड्राफ्ट में जहां गलत शिकायत करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान था, उसे लागू करते समय हटा दिया गया। वहीं ड्राफ्टिंग के समय व्ठब् को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन लागू करते समय ैब्ध्ैज् के साथ व्ठब् को भी जोड़ दिया गया।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा “सरकार की सोच यह बनती जा रही है कि सवर्ण समाज स्वघोषित अपराधी है। यह सोच न सिर्फ गलत है बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”
अंत में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा “जब तक न्ळब् का यह काला कानून पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक सवर्ण समाज का लोकतांत्रिक आंदोलन देशभर में जारी रहेगा।”
