लखनऊ ! क्यों मंडल आयोग की तरह यूजीसी पर नौटंकी कर रहे हों ये कौन सा गेम है साहब आपसे दलित पिछड़ों के हितों की उम्मीद नहीं की जा सकती आप तो इन्हें विश्वकर्मा सम्मान योजना देकर पुस्तैनी धंधों में लगाकर भारतीय संस्कृति को मजबूत करने के समर्थक हैं तभी तो रोजी रोटी रोजगार और धन धरती शिक्षा सम्मान की जगह सकूलों में लफ़ड़ा कराने में लग गए अरे भाई विरोधी कहां मना कर रहे हैं सामाजिक व्यवस्था दुरुस्त करने को वो तो यह कह रहे कि स्कूलों भेदभाव और ज्यादा बढ़ेगा बच्चे एक दूसरे के नजदीक आते भी डरेंगे यदि सामाजिक भाईचारा पैदा करना ही चाहते हों तो अतिपिछड़ी जातियों के मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें जन संख्या अनुपात में विधायक सांसद मंत्री बना दो और देश में एससी एसटी एक्ट की तरह जाति उत्पीड़न एक्ट लागू कर दो किसी जाति के व्यक्ति का किसी भी जाति का व्यक्ति जातिगत अपमान नहीं कर पाएगा और यह केवल कालेज में ही नहीं प्रत्येक क्षेत्र में लागू होगा ,सभी दलित पिछड़े कुटने पीटने के बावजूद आपकी जिंदाबाद करते नहीं थकेंगे अगली सरकार भी आपकी होगी पहले अपनी नीयत साफ करों तब यूजीसी की बात करना और नाम भी ऐसा दो ताकि सबकी समझ में आए कौन नहीं जानता कि आप लोग इसे वापस कर लेंगे अभी तो कुछ लोगों ने आंदोलन शुरू किया कुछ दिनों बाद साधू संत ब्राह्मण बनिया ठाकुर सभी सड़कों पर खड़ा दिखाई देगा ये दलित पिछड़े सांसद विधायक मंत्री अधिकारी नहीं है जो यूही भगवान जी खुश होकर आपकी सरकार बनवाते रहे इस लिए मेरे भाई जनता के लिए काम करों अपने लिए नहीं यदि प्रत्येक क्षेत्र में जन संख्या अनुपात में हिस्सेदारी भी दें सकें और मुख्यमंत्री बना सकें तब समझा जा सकता है कि तुम लोग दलित पिछड़ों के हितैषी हों आरक्षण ही प्रत्येक क्षेत्र में जन संख्या अनुपात में दें डालो आपकी 29 में भी जिंदाबाद हों जाएगी वरना लागू करने से 10 प्रतिशत नाराज हुए हैं वापिस करने पर 90 प्रतिशत तुम्हारी रेल बना देंगे मैं तो यही सोचकर परेशान था कि स्वयं सत्ता को शूद्रों से दूर रखने वाले कैसे इतने मेहरबान हो गये क्योंकि ऐसे झुनझुने तो आप लोग थमाते ही रहते हों और फिर कोर्ट से वापसी का आदेश सर्व विदित है व्यवस्था बनाओ की दलित पिछड़ा हों या मुसलमान सिख इसाई हों या पंडित बनिया ठाकुर सभी को नाम से पुकारा जाए और सभी को भारतीय का जाति प्रमाण बनाकर दिया जाए भाजपाइयों तुम लोग चाहों तो चलते चलते भारत के इतिहास में एक बड़ा काम कर सकते हों कम से कम मैं बिना पूजा पाठ वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की फोटो लगाकर एक आरती बनाकर रोज पढ़ा करूंगा वरना नौटंकी को कौन नहीं जानता।
विनेश ठाकुर सम्पादक विधान केसरी लखनऊ
