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लखनऊ : अनुशासन ही सरल एवं सही जीवन है-नीलम शाक्य


लखनऊ/सीतापुर। अच्छा अनुशासन ही अच्छी व्यवस्था का पर्याय हो सकता है। अनुशासन व्यवहार से नहीं बल्कि उसके आन्तरिक आचरण की भावनाओं से है स अनुशासन वह साधन है जिसके द्वारा नियमितता उत्तम तथा अच्छी-अच्छी आदतों से शिक्षा प्राप्त करता है। जिससे कि वह उन समस्त सुन्दर बातों को प्राप्त कर सके जो उसके अन्दर छिपी हो। आत्मानुशासन, ऐसा अनुशासन जो भीतर से हो जो मूलतः किसी बाहरी नियन्त्रण पर निर्भर न हो। इसके अतिरिक्त ऐसा अनुशासन तभी विकसित हो सकता है जब जीवन के प्रति गम्भीरतर लक्ष्यों से उसका गहत्या सम्बन्ध हो और उसका विद्या के प्रति रुचि और भक्ति से होता है।शिक्षा में शिक्षकों में साहचर्य भाव हो स उसका आधार पारस्परिक स्नेह-सम्मान तथा सत्य-सम्मान के प्रति बहुमुखी उत्कर्ष के प्रति तथा सम्पूर्ण समाज के कल्याण के प्रति समान निष्ठा भाव हो । यदि यह भावना उत्पन्न हो जाये तो बहुत सी समस्यायें हल करना आसान हो जायेगा। जिसके कारण आज हमारा जीवन विश्श्रृंखलित है और हमें आशा है कि धीरे-धीरे में समस्याएं स्वंय में विलीन हो जाएगी।

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