लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चैहान ने गाजियाबाद में तीन सगी बहनों द्वारा आत्महत्या की हृदयविदारक घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में उन्होंने बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर मोबाइल फोन एवं डिजिटल माध्यमों के दुष्प्रभावों को लेकर गहरी चिंता जताई है।
डॉ. बबीता सिंह चैहान ने बताया कि प्रथम दृष्टया इस घटना के पीछे मोबाइल गेम खेलने की लत तथा पिता द्वारा इसका विरोध प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज एवं शिक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की मजबूरी के चलते मोबाइल आधारित शिक्षण व्यवस्था अपनाई गई थी, लेकिन सामान्य परिस्थितियां लौटने के बाद भी कई स्कूलों में होमवर्क, असाइनमेंट और अन्य गतिविधियां अनिवार्य रूप से व्हाट्सएप ग्रुप एवं डिजिटल माध्यमों से भेजी जा रही हैं। इसके कारण बच्चों के हाथ में लगातार मोबाइल रहने की स्थिति बन गई है।
महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि कम उम्र के बच्चे मोबाइल के प्रति मानसिक, भावनात्मक और व्यवहारिक रूप से आसक्त होते जा रहे हैं। अनियंत्रित गेमिंग, सोशल मीडिया और अन्य अवांछनीय गतिविधियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. चैहान ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी जनपदों में कक्षा 5 तक के शासकीय, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों में विषम परिस्थितियों को छोड़कर मोबाइल फोन के माध्यम से होमवर्क या असाइनमेंट भेजने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालयों में समस्त शैक्षणिक कार्य पूर्ण कराए जाएं तथा बच्चों को मोबाइल पर निर्भर बनाने वाली व्यवस्था समाप्त की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
