बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि पत्तागोभी खाने से कीड़े दिमाग में चले जाते हैं, जिससे इंसान पागल हो सकता है, दिमागी दौरा पड़ सकता है या मौत तक हो सकती है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या यह बात सच है? डॉक्टर ने बताया कि पत्तागोभी खेत में उगते समय मिट्टी और नमी के कारण आसानी से कीड़ों का घर बन जाती है। इसकी पत्तियां परतदार होती हैं, जिनके अंदर छोटे कीड़े और उनके अंडे छिपे रह सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पत्तागोभी खाने से सीधे दिमाग में कीड़े रेंगने लगते हैं।
एम्स की न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रियंका शेहरावत ने बताया, दिमाग का कीड़ा जिसे मेडिकल भाषा में न्यूरोसिस्टीसरकोसिस कहते हैं। इसमें न्यूरो मतलब दिमाग, सिस्टी मतलब सिस्ट और सरकोसिस उस वॉर्म यानि कीड़े के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसका नाम है टीनिया सोलियम (Taenia Solium)। डॉक्टर ने बताया कि ऐसा नहीं है कि ये कीड़ा दिमाग में रेंगता और चलता फिरता रहता है। इस कीड़े के अंडे मिट्टी में पाए जाते हैं, गंदी सब्जियों में होते हैं और अधपके मांस और पोर्क में पाए जा सकते हैं। अगर आप इन्हें खाते हैं तो स्टमक एसिड इस कीड़े के अंडे को डिजॉल्व नहीं कर पाते हैं। जिसकी वजह से ये अंडे खून से होते हुए शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच सकते हैं। ज्यादातर ये दिमाग, आंख, लिवर, फेफड़ों और मांसपेशियां में जाकर जमा हो जाते हैं। जब ये अंडे दिमाग में पहुंचते हैं तो दिमाग उसके खिलाफ रिएक्ट करता है। इससे दिमाग में सूजन आ जाती है।
दिमाग में सूजन आने की वजह से मरीज को सिर दर्द होना और दौरे आने शुरू हो जाते हैं। उल्टी की समस्या होती है और चक्कर आने लगते हैं। न्यूरोसिस्टीसरकोसिस देश में बच्चों में दौरे आने का सबसे बड़ा कारण है। ये दौरे किसी भी उम्र के लोगों को आ सकते हैं। इलाज की बात करें तो 98 प्रतिशत मरीज दवाओं से ठीक हो जाते हैं, जबकि सिर्फ 2 प्रतिशत मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
दिमाग के कीड़े से कैसे बचें
- कच्चा या अधपका मांस और पोर्क खाने से आपको पूरी तरह से बचना चाहिए।
- सब्जियों को अच्छी तरह से पानी से धो लें चलते हुए पानी में सब्जियों को वॉश करें।
- अब सब्जियों को पूरी तरह से सूखने दें क्योंकि गीली सब्जियों में भी कीड़ा पनपने लगता है।
- सब्जियों को मीडियम फ्लेम पर लंबे समय तक पकाने से ये अंडे जीवित नहीं रहते हैं।
- इसलिए कच्ची सब्जी, सलाद और गंदी चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
