अमेठीः संस्कृत पाठशालाओं में मानदेय व शिक्षकों को पूर्णकालिक करने की मांग
February 14, 2026
अमेठी। प्रदेश की संस्कृत पाठशालाओं में कार्यरत मानदेय शिक्षकों को पूर्णकालिक करने की मांग तेज हो गई है। दिन शुक्रवार को विधानपरिषद में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विधानपरिषद में मानदेय संस्कृत शिक्षकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सनातन परंपरा और देववाणी संस्कृत को जीवित रखने में इन शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अल्प मानदेय और अस्थायी व्यवस्था के कारण कई पाठशालाएं प्रभावित हो रही हैं। वर्तमान में हाईस्कूल और इंटर स्तर पर नियुक्त मानदेय शिक्षकों को क्रमशः 20,000 और 25,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। यह मानदेय वर्ष में 11 माह के लिए प्रदान किया जाता है। पूर्णकालिक शिक्षकों के अभाव में कई संस्कृत पाठशालाएं इन्हीं मानदेय शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रही हैं। सदन में कहा गया कि हजारों की संख्या में कार्यरत ये शिक्षक लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। मानदेय संस्कृत शिक्षकों द्वारा सरकार से लंबे समय से गुहार लगाई जा रही है कि रिक्त पदों के सापेक्ष उन्हें पूर्णकालिक शिक्षक बनाया जाए। शिक्षकों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था के चलते उनमें असंतोष व्याप्त है और स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। इस मुद्दे पर बुद्धिजीवियों, संस्कृत प्रेमियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने भी समर्थन जताया है। सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए मांग की गई कि संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत मानदेय शिक्षकों को शीघ्र पूर्णकालिक किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। अध्यक्ष ने इस विषय पर सरकार को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित करने की बात कही है। अब देखना होगा कि सरकार इस महत्वपूर्ण मांग पर क्या निर्णय लेती है। सदन में मानदेय संस्कृत शिक्षकों की मांग उठाये जाने पर जनपद के मानदेय संस्कृत शिक्षकों द्वारा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी का आभार व्यक्त किया गया है। संस्कृत शिक्षक उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष पुष्कर पांडेय, महामंत्री रवींद्र कुमार मिश्र, मंत्री डॉ. दीप नारायण शुक्ल, संयुक्त मंत्री दया शंकर पाठक, कोषाध्यक्ष अजय कुमार शुक्ल ने शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी का धन्यवाद देते हुए सरकार से जल्द से जल्द संस्कृत शिक्षकों को नियमित करने की मांग की है।
