पीलीभीतः राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार की समीक्षा बैठक में सख्ती! सपा जिलाध्यक्ष को बताया “फेसबुकिया”, कहा विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं
February 21, 2026
पीलीभीत। जिले में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर प्रदेश के राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों से सरकार की छवि बनती है। उन्होंने विकास कार्यों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी। बैठक के दौरान राज्यमंत्री का रुख केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी तीखा नजर आया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा पर निशाना साधते हुए उन्हें “फेसबुकिया नेता” बताया और कहा कि अपने नेतृत्व में कोई चुनाव जीतकर दिखाएं, तभी जनता में स्वीकार्यता साबित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को सोशल मीडिया की राजनीति छोड़कर जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए। राज्यमंत्री ने पूर्व सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले “वन जिला, वन माफिया” जैसी स्थिति थी, जबकि वर्तमान सरकार विकास और पारदर्शिता के एजेंडे पर काम कर रही है। उनका कहना था कि अधूरी सड़कें, जल निकासी की समस्याएं और लंबित परियोजनाएं किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं। समीक्षा बैठक में विभागवार प्रगति रिपोर्ट तलब की गई। राज्यमंत्री ने कहा कि जिन परियोजनाओं की समय-सीमा तय है, वे हर हाल में पूरी हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता को सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं समय पर मिलनी चाहिए। लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय होगी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन जिले की जनता की प्राथमिकता बुनियादी सुविधाएं हैं। पीलीभीत जैसे सीमावर्ती और कृषि प्रधान जिले में विकास की रफ्तार का सीधा असर किसानों, व्यापारियों और युवाओं पर पड़ता है। अधूरी परियोजनाएं जनता के धैर्य की परीक्षा लेती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सख्ती तभी प्रभावी होगी, जब उसकी निरंतर निगरानी हो और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। विपक्ष का दायित्व है कि वह रचनात्मक सुझाव दे, जबकि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह परिणामों के माध्यम से जवाब दे। फिलहाल जिले की राजनीति में यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि सख्ती और बयानबाजी के बाद विकास कार्यों की गति कितनी तेज होती है और जनता को उसका लाभ कब तक मिलता है।
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