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सलमान खान उद्धव ठाकरे से बड़े हिंदू हैं-नितेश राणे


महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने यहां तक कहा कि सलमान खान तो उद्धव ठाकरे से बड़े हिंदू हैं। उन्होंने आरएसएस के कार्यक्रम में जाने की हिम्मत तो दिखाई। उद्धव ठाकरे तो राहुल गांधी के सामने अपने पिता को हिंदू हृदय सम्राट बोलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते।

दरअसल, 8 फरवरी को मुंबई में संघ प्रमुख ने संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक संवाद किया था। इस संवाद में विभिन्न क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों ने भी शिरकत की थी। इसी को लेकर राज ठाकरे सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि इस इवेंट में अलग-अलग फील्ड के कई जाने-माने लोगों को बुलाया गया था। और उनमें से कुछ असल में आए भी। लेकिन मैं मोहनराव भागवत को साफ-साफ बताना चाहूंगा कि वे आपसे प्यार की वजह से नहीं आए थे; वे नरेंद्र मोदी की सरकार के डर से आए थे। प्लीज़ इस गलतफहमी से बाहर निकलें कि वे आपके लिए वहां आए थे। नितेश राणे ने कहा कि मैं राज ठाकरे से सिर्फ इतना ही कहूंगा कि जब मुंब्रा की AIMIM की पार्षद हिंदी में बोलती है कि कैसा हराया तब राज ठाकरे कहां थे? उद्धव कहां थे?

आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में धर्मांतरण, घुसपैठ और कम जन्म दर को जनसंख्या असंतुलन के लिए जिम्मेदार तीन प्रमुख कारक बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध "एक परिवार में तीन बच्चे पैदा करने" का सुझाव देते हैं, जो हालांकि पसंद का मामला है। भागवत ने लोगों का धर्मांतरण कराने और किसी संप्रदाय की आबादी बढ़ाने के लिए बल, प्रलोभन और छल का सहारा लिए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके लिए "घर वापसी" ही एकमात्र उपाय है।

घुसपैठ से जुड़े एक सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता भाषा के जरिये संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान करते हैं और उनकी सूचना अधिकारियों को देते हैं। जनसंख्या असंतुलन पर आरएसएस प्रमुख ने कहा, "इसके तीन प्रमुख कारण हैं; पहला-धर्मांतरण। हालांकि, धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी है, लेकिन लोगों का धर्म बदलवाने और किसी संप्रदाय की आबादी बढ़ाने के लिए बल, प्रलोभन या छल का सहारा लिया जाना पूरी तरह से निंदनीय है।" भागवत ने कहा कि जो लोग अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं, हम उनके लिए रास्ता बनाते हैं और ऐसे लोगों के लिए "घर वापसी" ही एकमात्र उपाय है।

संघ प्रमुख ने कहा, "दूसरा कारण घुसपैठ है, जिसके लिए सरकार को बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो अभी धीमी गति से चल रही है, लेकिन इसमें तेजी आएगी। भागवत ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास का हवाला दिया, जिसके तहत कुछ व्यक्तियों को गैर-नागरिक के रूप में पहचाना गया है और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। भागवत ने कहा, "आरएसएस कार्यकर्ताओं ने भी भाषा के माध्यम से संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान की है और उनके बारे में अधिकारियों को सूचना दी है।" उन्होंने कहा कि मुस्लिम सहित भारतीय नागरिकों को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन विदेशियों को नहीं। भागवत ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन का तीसरा कारण कम जन्म दर है। एक सवाल के जवाब में संघ प्रमुख ने कहा कि डॉक्टरों ने सलाह दी है कि 19 से 25 साल की उम्र के बीच शादी और तीन बच्चों का जन्म माता-पिता और बच्चों, दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक होता है, जबकि मनोवैज्ञानिकों का मानना ​​है कि तीन बच्चे 'मैं' की भावना से निपटने में मदद करते हैं और दीर्घकालिक रूप से एक स्थिर पारिवारिक जीवन सुनिश्चित करते हैं।

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