संग्रामपुर/अमेठी। जनपद के भेटुआ विकास खंड अंतर्गत पीडीएनजी कॉलेज से टिकावर गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग वर्तमान में लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन की विफलता का जीवंत प्रमाण बन चुका है। वर्षों पूर्व निर्मित यह मार्ग, जो कभी डामरीकरण के माध्यम से आवागमन का आधार था, आज विखंडित होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। मार्ग के अवशेषों पर लगे खड़ंजे भी ध्वस्त होकर जानलेवा गड्ढों में परिवर्तित हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र की व्यापक आबादी का आवागमन का मौलिक अधिकार बाधित हो रहा है। विदित हो कि यह मार्ग मात्र एक संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों के सामाजिक और आर्थिक संव्यवहार की धुरी है। धम्मौर बाजार, बसावन तिवारी का पुरवा स्थित उपडाकघर और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँचने के लिए ग्रामीण इसी मार्ग पर आश्रित हैं। छात्र-छात्राएं आए दिन कीचड़ और मलबे में फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, जिससे उनकी शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।जर्जर मार्ग के कारण वृद्धों और बीमारों को चिकित्सा केंद्र तक ले जाने में श्गोल्डन ऑवरश् की हानि हो रही है, जो जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।गड्ढों के कारण क्षेत्रवासियों के वाहनों में निरंतर तकनीकी खराबी आ रही है, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति वहन करनी पड़ रही है। स्थानीय नागरिक गोरखनाथ तिवारी राजू ने विधिक पक्ष रखते हुए कहा, चुनाव पूर्व किए गए आश्वासन अब तक क्रियान्वित नहीं हुए हैं। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है,बल्कि जनता के भरोसे के साथ छल है। ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को बार-बार प्रतिवेदन दिए जाने के उपरांत भी शून्य कार्यवाही की स्थिति बनी हुई है। क्षेत्रवासियों ने शासन को आगाह किया है कि यदि लोकहित को प्राथमिकता देते हुए मार्ग का अविलंब पुनरुद्धार प्रारंभ नहीं किया गया, तो वे संवैधानिक मर्यादा के भीतर रहते हुए व्यापक जन-आंदोलन और धरना-प्रदर्शन हेतु बाध्य होंगे। क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी अनहोनी की प्रतीक्षा कर रहा है? क्या करदाताओं को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना शासन की प्राथमिकताओं में सम्मिलित नहीं है?।
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