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पीलीभीत: मानवदृहाथी संघर्ष प्रबंधन को लेकर कार्यशाला आयोजित! सभी विभागों के समन्वय पर दिया गया जोर


पीलीभीत। जनपद में बढ़ते मानवदृहाथी संघर्ष की समस्या के प्रभावी समाधान को लेकर वन एवं वन्यजीव प्रभाग, पीलीभीत टाइगर रिजर्व द्वारा विश्व प्रकृति निधिदृभारत (ॅॅथ्-प्दकपं) के सहयोग से मरौरी ब्लॉक परिसर में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य मानवदृहाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करना, प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित व समन्वित कार्यवाही सुनिश्चित करना तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी को मजबूत करना रहा।

कार्यशाला में वन विभाग के साथ-साथ कृषि, राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं विकास, सिंचाई, विद्युत विभाग के अधिकारियों, ग्राम प्रधानों, बाघ मित्रों एवं अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व मनीष सिंह ने कहा कि हाथियों से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। बाघ मित्रों, ग्राम प्रधानों एवं ईको-विकास समितियों के प्रतिनिधियों को सशक्त बनाकर मानवदृहाथी संघर्ष प्रबंधन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में सभी संबंधित विभागों का आपसी समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

प्रभागीय निदेशक, वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने कहा  जनपद में मानवदृहाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इस प्रकार की कार्यशालाएं अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी, जिनसे प्रशिक्षित बाघ मित्र एवं विभागीय कर्मचारी संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने सुझाव दिया कि जंगल के किनारे औषधीय एवं कम आकर्षक फसलों की खेती को बढ़ावा देकर हाथियों के खेतों में प्रवेश की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हर संभव चिकित्सा सहयोग उपलब्ध कराएगा।

सीओ ट्रैफिक श्री विधि मौर्य ने आश्वासन दिया कि मानवदृहाथी संघर्ष की स्थिति में पुलिस विभाग हर स्तर पर सहयोग के लिए तत्पर रहेगा। वहीं डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने हाथियों के ऐतिहासिक एवं व्यवहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हाथी अपने अनुवांशिक गुणों के कारण अपने पूर्वजों के क्षेत्रों में भ्रमण करते हैं, जिससे संघर्ष की स्थितियां उत्पन्न होती हैं।

डीएफओ, उत्तर खीरी वन प्रभाग  कीर्ति चैधरी ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व एवं दुधवा टाइगर रिजर्व के बीच हाथी कॉरिडोर को सुदृढ़ करने के लिए आपसी समन्वय पर विशेष जोर दिया। वरिष्ठ परियोजना अधिकारी श्री दबीर हसन ने तराई एलिफेंट रिजर्व, हाथियों के प्राकृतिक आवास, कॉरिडोर, उनके व्यवहार तथा दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों एवं बाघ मित्रों को मुआवजा प्रक्रिया, मानवदृहाथी संघर्ष प्रबंधन की मानक संचालन प्रक्रिया (ैव्च्), समुदाय आधारित संस्थाओं तथा त्वरित प्रतिक्रिया दलों के गठन के बारे में भी अवगत कराया।

वरिष्ठ परियोजना अधिकारी, ॅॅथ्-प्दकपं  नरेश कुमार ने वन्यजीवों से होने वाली जनदृधन क्षति की मुआवजा प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कार्यशाला का सफल संचालन किया।कार्यशाला में एसडीओ  रमेश चैहान, जेई श्री दीपक शुक्ल (शारदा सागर), वीडीओ मरौरी  लियाकत अली, वीडीओ अमरिया  दिनेश सिंह, वीडीओ ललौरीखेड़ा  लक्ष्मण प्रसाद, उप निरीक्षक श्री शेर सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।कार्यशाला के अंत में सभी विभागों ने मानवदृहाथी संघर्ष को कम करने के लिए संयुक्त प्रयासों, सतत संवाद एवं निरंतर समन्वय के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।

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