विक्रम पाण्डेय
संग्रामपुर (अमेठी): प्रधानमन्त्री की महत्वाकांक्षी योजना हर घर जल अमेठी के संग्रामपुर ब्लॉक में विभागीय भ्रष्टाचार और ठेकेदारों की सिंडिकेट
कार्यप्रणाली के चलते दम तोड़ रही है। ग्राम पंचायत जरौटा से आई तस्वीरें न केवल सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती हैं, बल्कि सरकारी खजाने के उस अपव्यय की गवाही दे रही हैं, जिसे विकास का नाम दिया गया था।
हकीकत यह है कि जरौटा में बिछाई गई पाइपलाइन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। कई स्थानों पर पाइप फटे हुए हैं और कीमती स्वच्छ जल घरों तक पहुँचने के बजाय नालियों और गड्ढों में समा रहा है। यह न केवल लोक संपत्ति का दुरुपयोग है, बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही का साक्ष्य भी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने केवल कागजों पर लक्ष्य पूरा करने के फेर में गुणवत्ता के मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई हैं।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 जीवन का अधिकार के अंतर्गत स्वच्छ पेयजल को मौलिक अधिकार की श्रेणी में रखा है। लेकिन जरौटा के संत प्रसाद मिश्र,कृष्णा शंकर मिश्र और वेद प्रकाश जैसे ग्रामीणों की व्यथा सुनकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ का प्रशासन संविधान प्रदत्त अधिकारों से अनभिज्ञ है। बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद विभागीय अभियंताओं की अकर्मण्यता और मौन स्वीकृति इस घोटाले में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करती है।
स्थानीय ग्राम प्रधान ने पाइपलाइन ठीक कराने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिना तकनीकी जांच और रिकवरी के क्या जनता के पैसे की इस बर्बादी की भरपाई संभव है?
जब तक इस प्रकरण में संबंधित कार्यदायी संस्था और दोषी अभियंताओं पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक जल जीवन मिशन जैसे पवित्र अभियान भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर चढ़ते रहेंगे। जिलाधिकारी अमेठी को इस प्रकरण में विभागीय जांच के साथ-साथ वित्तीय ऑडिट के आदेश देने चाहिए।
