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पीलीभीत: चिरौंजीलाल वीरेंद्रपाल सरस्वती विद्यामंदिर में विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन! हजारों की संख्या में उमड़ा जनसैलाब संघ के सह क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख डॉ. हरीश रौतेला के ओजस्वी उद्बोधन


पीलीभीत। निरंतर चल रही विराट हिन्दू सम्मेलन श्रृंखला के अंतर्गत आज विकास खण्ड मरौरी के चिरौंजीलाल वीरेंद्रपाल सरस्वती विद्यामंदिर इंटर कॉलेज परिसर में भव्य एवं ऐतिहासिक विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में हजारों की संख्या में सनातनी बंधु-भगिनी, मातृशक्ति, युवा एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे। श्रद्धा, आस्था, संस्कृति और राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत इस विराट आयोजन ने पूरे क्षेत्र को सनातन चेतना से अनुप्राणित कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। वातावरण “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जय श्रीराम” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। इसके उपरांत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। छात्राओं ने मनोहारी नृत्य, देशभक्ति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा और संस्कारों का सुंदर प्रदर्शन किया। एकल गीत की प्रस्तुति ने भी सम्मेलन में विशेष आकर्षण पैदा किया।

मंचासीन अतिथियों में मुख्य वक्ता सह क्षेत्रीय सम्पर्क प्रमुख डॉ. हरीश रौतेला, मुख्य अतिथि पूज्य विष्णुदास  महाराज, कार्यक्रम अध्यक्ष अंचल गुप्ता, विशिष्ट अतिथि ऋचा वार्ष्णेय, कवयित्री उन्नति भारद्वाज तथा कवयित्री सरोज संगम उपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त विभाग संघचालक ओमप्रकाश जी, सह विभाग प्रचारक अमित कुमार, जिला प्रचारक दुष्यंत कुमार, नगर संघचालक प्रदीप नवरग, नगर प्रचारक कुलदीप कुमार, बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, ब्लॉक प्रमुख मरौरी सभ्यता वर्मा, विद्यालय प्रधानाचार्य सुभाष कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।मुख्य वक्ता डॉ. हरीश रौतेला ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि विश्व का सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्वर्णिम शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। नागपुर में मात्र पांच स्वयंसेवकों के साथ परम पूज्य डॉ. केशवराव हेडगेवार  द्वारा स्थापित यह संगठन आज सम्पूर्ण भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में राष्ट्र, समाज और संस्कृति के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “गर्व से कहो हम हिन्दू हैं” का नारा आज जन-आंदोलन बन चुका है, जो भारत के गौरव और आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचा सकता है।मुख्य अतिथि पूज्य विष्णुदास  महाराज ने अपने आशीर्वचनों में सनातन संस्कृति, सेवा, त्याग और सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। कवयित्री उन्नति भारद्वाज ने अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं कवयित्री सरोज संगम की रचनाओं ने भी वातावरण को भावनात्मक बना दिया।

विशिष्ट अतिथि ऋचा वार्ष्णेय ने मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संस्कारवान परिवार और संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, व्यवस्था और सांस्कृतिक गरिमा देखने योग्य रही। विशाल जनसमूह के बावजूद कार्यक्रम सुचारु रूप से सम्पन्न हुआ। सम्मेलन स्थल पर भजन-कीर्तन, जयघोष और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण ने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। कार्यक्रम के सफल समापन के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों ने प्रसाद ग्रहण किया।अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, स्वयंसेवकों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन जगदीश सक्सेना द्वारा किया गया। कुल मिलाकर विराट हिन्दू सम्मेलन ने समाज में सांस्कृतिक चेतना, एकता और राष्ट्रभाव को नई ऊर्जा प्रदान की और इसे क्षेत्र का एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी आयोजन बताया गया।

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