सुल्तानपुर। जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन की हालत दिनोंदिन खतरनाक होती जा रही है। वर्ष 1985 में निर्मित यह भवन वर्ष 1995 में विकास विभाग को हैंडओवर किया गया था, लेकिन अब करीब चार दशक पुरानी यह इमारत जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है।
भवन की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं, कई जगहों पर छत से प्लास्टर झड़ रहा है और सरिया बाहर दिखाई दे रही है। बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
विकास भवन में प्रतिदिन सैकड़ों फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच डर का माहौल बना हुआ है। कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे असुरक्षा की भावना के साथ काम करने को मजबूर हैं।
जिला विकास अधिकारी गजेंद्र तिवारी ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। बजट स्वीकृत होते ही आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।
फिलहाल सवाल यह है कि बजट आने तक क्या प्रशासन कोई अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था करेगा? क्योंकि मौजूदा हालत को देखते हुए विकास भवन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
