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पीलीभीतः पीटीआर के जंगल में महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने से हड़कंप! वन विभाग की चेतावनियाँ बेअसर, जंगल में प्रवेश बना जानलेवा


पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की महोफ रेंज के जंगल में बुधवार सुबह एक बुजुर्ग महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। जंगल में फैली इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। महिला की हालत इतनी भयावह थी कि प्रथम दृष्टया बाघ के हमले की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

मृतका की पहचान पारुल राय (62) पत्नी सुकुमार राय, निवासी भद्र कॉलोनी, महोफ रेंज क्षेत्र के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पारुल राय रोजमर्रा की तरह जंगल में लकड़ी बीनने गई थीं। इसी दौरान उनके साथ यह दर्दनाक हादसा हो गया। सुबह जब ग्रामीण जंगल की ओर गए तो महिला का क्षत-विक्षत शव देखकर सन्न रह गए और तुरंत पुलिस व वन विभाग को सूचना दी।

सूचना मिलते ही  पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला की मौत बाघ या किसी अन्य वन्यजीव के हमले से हुई है अथवा इसके पीछे कोई अन्य कारण है।

घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि पीटीआर क्षेत्र में पहले से ही बाघों और अन्य खतरनाक वन्यजीवों की सक्रियता बनी हुई है, इसके बावजूद वन विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। चेतावनी बोर्ड और मुनादी के बावजूद लोग मजबूरी में जंगल में जाने को विवश हैं, क्योंकि उनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग केवल चेतावनी जारी कर अपनी जिम्मेदारी से बचता है, जबकि जमीनी स्तर पर न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही संवेदनशील इलाकों को पूरी तरह सील किया गया। परिणामस्वरूप, आए दिन इस तरह की घटनाएँ सामने आ रही हैं।

महिला की मौत के बाद महोफ रेंज से सटे गांवों में दहशत का माहौल है। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने से रोक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही बाघ की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और सुरक्षा इंतजाम नहीं बढ़ाए गए, तो कोई बड़ा हादसा फिर से हो सकता है।

वन विभाग ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वे जंगल क्षेत्र में प्रवेश न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना तुरंत विभाग को दें। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।फिलहाल, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पीटीआर क्षेत्र में मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि चेतावनियों और दावों के बीच आखिर कब तक ग्रामीण अपनी जान गंवाते रहेंगे?।

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