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पीलीभीतः मनरेगा को कमजोर करने की साजिश! जिला अध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा बोले-गरीबों की आजीविका पर चोट बर्दाश्त नहीं


पीलीभीत। रविवार को कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा ने शहर के निजी होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 20 वर्ष पूर्व यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून संविधान में निहित ‘काम के अधिकार’ को वास्तविक रूप देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। इस अधिनियम ने ग्राम पंचायतों को गांव स्तर की विकास परियोजनाओं पर निर्णय लेने का अधिकार देकर पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त किया।जिला अध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान मनरेगा ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा साबित हुई। संकट की घड़ी में करोड़ों गरीब परिवारों को रोजगार और सम्मानजनक जीवनयापन का सहारा इसी योजना से मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार भारत के गरीब और मजदूर वर्ग से उनकी गरिमा, सुरक्षा और आजीविका की गारंटी छीनने की साजिश कर रही है। मनरेगा कानून को कमजोर कर उसे धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।हरप्रीत सिंह चब्बा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस कदम का डटकर विरोध कर रही है और जब तक मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में पूरी तरह बहाल नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार द्वारा कथित मजदूर-विरोधी नियम लाए जाने के बाद कांग्रेस ने 3 जनवरी से देशभर में “मनरेगा बचाओ संग्राम” की शुरुआत की। पिछले एक महीने से यह आंदोलन गांधीवादी तरीके से लगातार चल रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश भर में 5000 से अधिक ‘मनरेगा बचाओ चैपाल’ आयोजित की जा चुकी हैं, जबकि 13 फरवरी को सभी 75 जनपदों में ‘मनरेगा बचाओ पदयात्रा’ निकाली गई। अब इस आंदोलन का दूसरा चरण प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके तहत 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव किया जाएगा।चब्बा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए मनरेगा का वित्तीय बोझ राज्यों पर डालना चाहती है। उन्होंने कहा कि कानून में किए जा रहे बदलाव देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास हैं।अंत में जिला अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं और आम जनता से अपील की कि 17 फरवरी को अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ पहुंचकर आंदोलन को मजबूती दें और केंद्र सरकार को गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण भारत की आवाज सुनने के लिए मजबूर करें।

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