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पीलीभीत: जिला गन्ना अधिकारी की जाँच में खुलासा, सीतापुर आँख अस्पताल प्रकरण में अस्थायी कर्मचारी हटाया गया! एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि पर प्रशासन सख्त, चिकित्सक पर दबाव बनाने के आरोप से अस्पताल में चिंता का माहौल


पीलीभीत। जिलाधिकारी द्वारा सीतापुर आँख अस्पताल से जुड़े प्रकरण की जाँच के निर्देश दिए जाने के बाद जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने मौके पर पहुँचकर पूरे मामले की विस्तार से जाँच-पड़ताल की तथा संबंधित अभिलेखों और कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की।

जाँच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जसकरन नामक व्यक्ति को अस्पताल में अस्थायी आधार पर सीमित अवधि के लिए कार्य करने हेतु रखा गया था। नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत उससे चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन उसने इसे उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। इस पर अस्पताल प्रशासन ने एहतियातन उसके संबंध में थाना सुनगढ़ी से जानकारी प्राप्त की। पुलिस रिकॉर्ड की जाँच में पता चला कि 11 अक्टूबर 2024 को उक्त व्यक्ति के विरुद्ध गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। अभिलेखों के अनुसार जसकरन पुत्र मुरलीधर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से उसे कार्य पर आने से रोक दिया और स्पष्ट कर दिया कि लंबित आपराधिक प्रकरण के चलते उसे सेवा में नहीं रखा जा सकता।

जाँच में यह भी उल्लेखित हुआ कि कार्य से हटाए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति लगातार अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. एन. के. बालियान पर पुनः नौकरी पर रखने का दबाव बना रहा है। उसने आईजीआरएस पोर्टल सहित विभिन्न माध्यमों से शिकायतें दर्ज कराईं तथा जिलाधिकारी कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र दिया, जिनमें से एक शिकायत को एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र ने प्रकाशित किया था। अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि वह अलग-अलग माध्यमों से अनुचित दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, जिसके कारण चिकित्सक और उनके परिजन मानसिक तनाव व भय की स्थिति में हैं।अस्पताल प्रशासन ने जाँच अधिकारी को बताया कि डॉ. बालियान क्षेत्र के प्रतिष्ठित नेत्र विशेषज्ञ हैं और अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 50 से 60 मरीजों का उपचार किया जाता है। इसके अलावा प्रति वर्ष 650 से अधिक नेत्र ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जाते हैं। अस्पताल राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम तथा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत भी मरीजों को उपचार सुविधा प्रदान करता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को विशेष लाभ मिलता है। वर्ष 1964 में स्थापित यह अस्पताल कई दशकों से निरंतर नेत्र चिकित्सा सेवाएँ दे रहा है और आसपास के जिलों के मरीज भी यहाँ उपचार के लिए पहुँचते हैं। जिला गन्ना अधिकारी द्वारा की गई जाँच रिपोर्ट प्रशासन को प्रेषित किए जाने की प्रक्रिया में है, जिसके आधार पर आगे आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने कहा कि  “जिलाधिकारी के निर्देश पर सीतापुर आँख अस्पताल प्रकरण की स्थलीय जाँच की गई। जाँच में पाया गया कि संबंधित व्यक्ति को अस्थायी रूप से रखा गया था तथा चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करने और उसके विरुद्ध थाना सुनगढ़ी में प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि पर अस्पताल प्रशासन ने उसे कार्य पर आने से मना कर दिया। उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर विस्तृत जाँच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित की 

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