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488 दुकानों के किराये पर महापौर से व्यापारियों की लंबी बैठक, सहमति नहीं बनी

•किराया वृद्धि पर महापौर व्यापारी आमने-सामने, नगर निगम कैंप कार्यालय में घंटों चली बातचीत
•नगर निगम दुकानों के बढ़े किराये पर मंथन, महापौर बोले शासनादेश के तहत तय हुआ किराया
•200 मासिक किराये से 4000 हुआ किराया, 25 वर्षों बाद बढ़ी निगम दुकानों की दरें: मेयर
•महापौर विनोद अग्रवाल बोलेनिर्धारित किराया पूरी तरह न्यायसंगत
व्यापारियों से बैठक करने के बाद मीडिया को जानकारी देते मेयर

मुरादाबाद (विधान केसरी)। सदर थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित नगर निगम की 488 दुकानों के किराये में बढ़ोतरी को लेकर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। वर्षों से नगर निगम के पट्टे पर संचालित इन दुकानों से अब स्क्वायर फीट के आधार पर वार्षिक किराया वसूले जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे व्यापारियों में गहरा रोष है।
रविवार को बड़ी संख्या में व्यापारी पीली कोठी स्थित नगर निगम के कैंप कार्यालय पहुंचे, जहां महापौर प्रतिनिधि एवं महापौर विनोद अग्रवाल से दुकानों के किराये को लेकर लंबी बातचीत हुई। यह बैठक कई घंटों तक चली, लेकिन किसी ठोस सहमति पर नहीं पहुंच सकी। महापौर विनोद अग्रवाल ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि बीते 25 वर्षों से नगर निगम की दुकानों के किराये में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। अब तक ₹200 प्रतिमाह किराया लिया जा रहा था, जो वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत कम है। शासनादेश के अनुरूप अब लगभग ₹4000 प्रतिमाह किराया निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल मुरादाबाद नगर निगम के लिए नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर निकायों के अंतर्गत आने वाली दुकानों पर समान रूप से लागू किया गया है। महापौर ने कहा कि मुरादाबाद में वाणिज्यिक दुकानों का ₹4000 किराया अधिक नहीं है और इसे व्यापारी आसानी से वहन कर सकते हैं। साथ ही नगर निगम द्वारा शासनादेश के अनुरूप 30 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट देकर ही किराया तय किया गया है। उन्होंने बताया कि 2023 के शासनादेश के क्रम में किराया बढ़ाया गया है, ताकि नगर निगम की संपत्तियों का समुचित रख-रखाव सुनिश्चित किया जा सके। बैठक के दौरान प्रशासन ने व्यापारियों को 30 से 40 प्रतिशत तक की छूट देने की पेशकश की, लेकिन व्यापारियों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए असहमति जता दी। व्यापारियों का कहना है कि एक साथ इतनी अधिक वृद्धि से उनका व्यवसाय प्रभावित होगा।
महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि किराया निर्धारण किसी मनमानी के आधार पर नहीं किया गया है, बल्कि पार्षदों की विशेष समिति की रिपोर्ट और न्यायालय के आदेशों के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने व्यापारियों को आगाह किया कि यदि मामला पूरी तरह न्यायालय के विवेक पर गया, तो कोर्ट डीएम सर्किल रेट के आधार पर किराया तय कर सकता है, जो वर्तमान प्रस्तावित दरों से कहीं अधिक हो सकता है। जानकारों के अनुसार रत्न भाटिया प्रकरण में न्यायालय ने न केवल किराया बढ़ाने का आदेश दिया था, बल्कि दुकान ध्वस्त करने तक के निर्देश जारी किए थे। ऐसे में यदि विवाद न्यायालय में गहराया, तो व्यापारियों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है।
फिलहाल महापौर और व्यापारियों के बीच सहमति न बनने से मामला अधर में लटका हुआ है और आने वाले दिनों में इसे लेकर आंदोलन या कानूनी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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