इस राज्य में सफाईकर्मी को 2 लाख, इंजीनियर को 7 लाख, ड्राइवर को 1 लाख सैलरी
February 26, 2026
हैदराबाद में सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज (CESS) की तरफ से आयोजित 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर सम्मेलन के दौरान तेलंगाना के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने बुधवार (25 फरवरी 2026) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में राज्य का मासिक वेतन और पेंशन बिल चार गुना बढ़कर लगभग 6,000 करोड़ रुपये प्रति माह हो गया है, जिसमें कुछ वरिष्ठ सफाईकर्मी और ड्राइवर IAS अधिकारियों और राज्यपाल से भी अधिक वेतन ले रहे हैं, जिससे राज्य की वित्तीय जिम्मेदारी में भारी वृद्धि हुई है.
साल 2014 में जब तेलंगाना का गठन हुआ था, तब राज्य का मासिक वेतन और पेंशन बिल लगभग 1,500 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि बिजली विभाग और सरकारी एजेंसियों में लगातार हो रहे वेतन संशोधन इसका मुख्य कारण हैं. स्थिति यह है कि बिजली क्षेत्र के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) तक का वेतन 7 लाख रुपये माह पहुंच गया है, जबकि 30 साल की सेवा वाले सफाईकर्मी 2 लाख रुपये और ड्राइवर 1 लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं. ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) में नियमित हो चुके करीब 2 प्रतिशत सफाईकर्मी औसतन 70,000 रुपये वेतन और भत्ते पाते हैं, जो प्रवेश स्तर के कर्मचारियों के 28,000 रुपये के वेतन से कहीं अधिक है.
इस अनोखी स्थिति के पीछे सरकार की तरफ से नियुक्त वेतन संशोधन आयोगों का 'फिटमेंट' प्रतिशत और महंगाई भत्ता बढ़ाना प्रमुख कारण है. ये संशोधन अक्सर चुनाव चक्र के साथ तालमेल बिठाकर किए जाते हैं, जिससे कर्मचारी वर्ग को रियायतें तो मिल जाती हैं, लेकिन राज्य के निश्चित खर्च में भारी इजाफा होता है. बिजली विभागों में हर चार साल में होने वाले संशोधन ने वेतन संरचना को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे कुछ कर्मचारियों की कमाई देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से भी आगे निकल गई है.
इस खुलासे से तस्वीर साफ हो गई है कि राज्य का एक बड़ा हिस्सा अब केवल वेतन और पेंशन देने में ही निकल जाता है. जहां एक तरफ मेहनताना मिलना कर्मचारियों के लिए राहत की बात है, वहीं यह विसंगति कि सफाईकर्मी और ड्राइवर शीर्ष अधिकारियों से ज्यादा कमा रहे हैं, प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर सवाल खड़े करती है. बढ़ते निश्चित खर्च के बीच राज्य सरकार के सामने विकास कार्यों और नई योजनाओं के लिए धन जुटाना एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है.
