क्या हैं ओम बिरला के फ्रेंडशिप ग्रुप्स! जानें
February 26, 2026
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से फ्रेंडशिप ग्रुप्स के गठन की घोषणा ने भारतीय संसदीय कूटनीति में एक नई ऊर्जा भर दी है. युवा सांसद श्रीकांत शिंदे से लेकर वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम जैसे अनुभवी सांसदों को इन समूहों की अगुवाई सौंपे जाने की योजना, संसद के भीतर पीढ़ियों के समन्वय और दलगत सीमाओं से परे सहयोग का संकेत देती है. इस पहल का मुख्य मकसद भारत और विभिन्न देशों की संसदों के बीच रिश्तों को मजबूत करना है. वैश्विक राजनीति और आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. ऐसे में संसद-से-संसद संवाद (Parliament-to-Parliament Diplomacy) की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. फ्रेंडशिप ग्रुप्स” के माध्यम से भारतीय सांसद अपने विदेशी समकक्षों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर सकेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समझ और सहयोग बढ़ेगा.
ये समूह औपचारिक सरकारी वार्ताओं के समानांतर एक सॉफ्ट-डिप्लोमेसी प्लेटफॉर्म की तरह काम करेंगे, जहां सांसद अनौपचारिक लेकिन सार्थक चर्चा कर सकेंगे. इससे भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर समर्थन मिलेगा और वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज और प्रभाव मजबूत होगा.
इस पहल की खासियत यह है कि इसमें युवा और पहली बार संसद पहुंचे सांसदों को वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं के साथ नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जा रही है. उदाहरण के तौर पर, युवा सांसद श्रीकांत शिंदे जहां नई सोच, तकनीकी समझ और आधुनिक दृष्टिकोण लाएंगे, वहीं 80 वर्षीय पी. चिदंबरम जैसे नेता दशकों के संसदीय अनुभव और कूटनीतिक समझ से मार्गदर्शन देंगे. यह मॉडल न केवल अनुभव और ऊर्जा के संतुलन को दर्शाता है, बल्कि संसद के भीतर मेंटरशिप की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करता है. इससे युवा सांसद अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बारीकियों को समझ सकेंगे और भविष्य में भारत की कूटनीतिक भूमिका को और प्रभावी बना सकेंगे.
संसदीय फ्रेंडशिप ग्रुप्स ऐसे अनौपचारिक मंच होते हैं, जिनके जरिए सांसद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ संबंध विकसित करते हैं. इनका मसकद कई स्तरों पर सहयोग बढ़ाना होता है. भारत की सॉफ्ट पावर और लोकतांत्रिक मूल्यों को विश्व स्तर पर पेश करेंगे.
युवा सांसदों से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपना यह दिखाता है कि भारतीय लोकतंत्र में अनुभव और इनोवेशन. दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है. यह पहल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग और संवाद को प्राथमिकता देने का संदेश भी देती है.
