लखनऊ। राजधानी में जालसाजों ने एटीएस अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग दंपती को 12 दिनों तक खौफ के साये में रखा और उनसे 90 लाख रुपये वसूल लिए। शातिर ठगों ने आलमबाग निवासी दंपती को आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसने का डर दिखाया और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी वारंट भेजकर उन्हें घर के भीतर ही कैद रहने पर मजबूर कर दिया। इस हाई-टेक डकैती का खुलासा करते हुए लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह महज 3 प्रतिशत कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को बैंक खाते और डेबिट कार्ड उपलब्ध कराता था। पकड़े गए आरोपियों के खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन मिले हैं, जिनके तार देश के कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित के अनुसार, ठगी की शुरुआत 26 जनवरी को हुई कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। दंपती को डराया गया कि उनके नाम पर आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज हैं।सिग्नल ऐप डाउनलोड कराकर दंपती को वीडियो कॉल के जरिए 12 दिनों तक निगरानी डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। उन्हें विश्वास दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश और सीजर मेमो दिखाए गए। गिरफ्तारी से बचने के नाम पर 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच दंपती से 90 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
खुलासा करते हुए डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया पुलिस की साइबर टीम ने जांच के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो ठगी के पैसे खपाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।
मयंक श्रीवास्तव निवासी गोरखपुर आर्थिक तंगी के चलते गिरोह में शामिल हुआ। इसके खाते में एक ही दिन में 1.06 करोड़ रुपये आए थे। इरशाद निवासी गाजियाबादयह 3ः कमीशन पर खाते जुटाने और खाताधारकों को फंसाने का काम करता था। मनीष उर्फ आकाश निवासी दिल्ली यह भी कमीशन पर काम करता था और चेकबुक व डेबिट कार्ड अपने पास रखता था।
पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह का नेटवर्क दिल्ली और नोएडा के होटलों से संचालित हो रहा था। आरोपी मयंक को दिल्ली के पहाड़गंज स्थित एक होटल में ठहराया गया था और उसका मोबाइल पासवर्ड लेकर करोड़ों का लेन-देन किया गया। गिरोह के मुख्य सरगना जीतू और अन्य सदस्यों की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
जब पुलिस ने मुख्य खाते की जांच एनसीसीआरपी पोर्टल पर की, तो पता चला कि इसी गिरोह के खिलाफ तमिलनाडु समेत कई अन्य राज्यों में भी ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। अकेले 9 फरवरी को मयंक के खाते में 1.06 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा हुई थी।
