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संग्रामपुर: प्रशासनिक संकल्प! भेटुआ ब्लॉक में 10,851 परिवारों के आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त


संग्रामपुर/अमेठी। जनपद के भेटुआ विकास खंड में सोमवार को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सफल क्रियान्वयन एवं पात्र परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण हेतु एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आहूत की गई। प्रभारी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ)कुंवर विक्रम सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य एजेंडा अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारकों को स्वयं सहायता समूहों की विधिक परिधि में लाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना रहा। प्रभारी बीडीओ कुंवर विक्रम सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि चालू वित्तीय वर्ष हेतु विकास खंड भेटुआ को कुल 10,851 लाभार्थियों को समूहों से आच्छादित करने का वैधानिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने निर्देशित किया कि इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण अंचल की महिलाओं एवं निर्धनतम परिवारों को वित्तीय समावेशन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। ग्राम प्रधान, कोटेदार और समूह सखियों को निर्देशित किया गया है कि वे अंत्योदय परिवारों की पहचान कर उन्हें समूह के गठन और बैंक लिंकेज की प्रक्रिया से अविलंब जोड़ें। खंड विकास अधिकारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि लक्ष्य प्राप्ति में किसी भी प्रकार की शिथिलता या प्रशासनिक लापरवाही अक्षम्य होगी।बैंक सखियों को ऋण सुविधा और सरकारी अनुदानों के सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु विशेष उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं। बैठक में उपस्थित सहायक विकास अधिकारी (ग्राम्य विकास) एवं ब्लॉक मिशन प्रबंधकों को यह सुनिश्चित करने हेतु पाबंद किया गया कि प्रत्येक नव-गठित समूह का पंजीकरण एवं दस्तावेजीकरण नियमानुसार पूर्ण हो। प्रशासन का तर्क है कि जब गरीब परिवार संगठित होकर समूहों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएंगे, तो न केवल उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नवीन गति प्राप्त होगी। प्रभारी बीडीओ कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि  स्वयं सहायता समूह मात्र एक इकाई नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं। हमारा लक्ष्य केवल संख्यात्मक पूर्ति करना नहीं, बल्कि 10,851 परिवारों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है। बैठक का समापन एक ठोस कार्ययोजना के साथ हुआ, जिसमें नियमित अनुश्रवण और साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। अमेठी प्रशासन की इस पहल को जनपद में महिला सशक्तिकरण और गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक गेम-चेंजर कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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