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पीलीभीत: गांव में महिला पर जानलेवा हमला, थाने में इंसाफ की जगह मिली गालियां! मारपीट के आरोपियों को कथित संरक्षण, दरोगा पर पीड़ितों को धमकाने का गंभीर आरोप


पीलीभीत। थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के ग्राम भगू से कानून व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुरानी रंजिश के चलते एक महिला पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि हमलावर खुलेआम धमकी दे रहे हैं, जबकि पुलिस थाने में न्याय की गुहार लगाने पर उन्हें अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ा।ग्राम भगू निवासी प्रार्थी के अनुसार गांव के ही प्रीतम लाल, कढ़ेराम, वीरपाल व रिंकू उनसे रंजिश रखते हैं और परिवार को गांव से भगाने की धमकी दे रहे हैं। आरोप है कि 19 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 11रू30 बजे प्रार्थी की पत्नी टिकोली देवी को रास्ते में पकड़कर गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर आरोपियों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा। इसी दौरान वीरपाल द्वारा धारदार हथियार से हमला किए जाने का आरोप है, जिससे महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।

पीड़ित का कहना है कि जब वह और उसका पुत्र बीच-बचाव करने पहुंचे, तो उनके साथ भी मारपीट की गई। घटना के बाद घायल महिला को इलाज के लिए ले जाना पड़ा।मामले ने उस समय और गंभीर मोड़ ले लिया जब पीड़ित परिवार 18 जनवरी 2026 को थाना सुनगढ़ी शिकायत दर्ज कराने पहुंचा। आरोप है कि वहां तैनात दरोगा आकाश तेवतिया ने न केवल रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार किया, बल्कि गाली-गलौज करते हुए उन्हें धमकाया। पीड़ित का दावा है कि थाने में हुआ पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरों में कैद है।

सूत्रों के अनुसार, दरोगा आकाश तेवतिया पर पहले भी एक अधिवक्ता के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज का आरोप लग चुका है। उस समय भी उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।इस प्रकरण से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़ित महिला स्वयं आपबीती सुनाती नजर आ रही है। वीडियो में आरोप लगाया गया है कि हमलावरों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई से बच रही है।पीड़ित परिवार ने न्याय की आस में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली), उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग (लखनऊ), डीआईजी बरेली जोन, आईजी बरेली रेंज तथा पुलिस अधीक्षक पी को प्रार्थना पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।अब सवाल यह है कि क्या  पुलिस पीड़ित महिला को न्याय दिलाएगी या वर्दी पर लगे आरोप यूं ही दबा दिए जाएंगे?।

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