दिल्ली कैबिनेट ने ‘कार्बन क्रेडिट’ नीति को दी मंजूरी
January 14, 2026
दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। मंगलवार को हुई दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में पर्यावरण विभाग की ओर से लाए गए ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत दिल्ली सरकार अब अपने विभिन्न ग्रीन प्रोजेक्ट्स से होने वाली उत्सर्जन कटौती को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर राजस्व जुटाएगी।
इस ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ के लागू होने से सरकार को अतिरिक्त राजस्व स्रोत प्राप्त होंगे, जिसे विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार की इस योजना से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे प्राप्त होने वाले राजस्व को विकास कार्यों में लगाया जाएगा।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के मुताबिक यह योजना सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही पहल को कवर करेगी। पर्यावरण विभाग इस पूरे काम का नोडल विभाग होगा। दिल्ली सरकार वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसें चलाने, बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और कचरा प्रबंधन जैसे कई ऐसे काम कर रही है जिनसे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
इस नई नीति के तहत, इन सभी कामों से होने वाली प्रदूषण की कमी को वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा और उन्हें ‘कार्बन क्रेडिट’ के रूप में रजिस्टर कराया जाएगा। इन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्बन मार्केट में बेचा जा सकेगा, जिससे दिल्ली सरकार को राजस्व प्राप्त होगा।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका वित्तीय मॉडल है। दिल्ली सरकार का पर्यावरण विभाग पारदर्शी टेंडर (RFP) प्रक्रिया के जरिए एक विशेषज्ञ एजेंसी का चयन करेगा। यह एजेंसी देखेगी कि किन-किन योजनाओं से कार्बन क्रेडिट बन सकते हैं। इसके बाद उनका डाक्यूमेंटेशन और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर रजिस्ट्रेशन का सारा काम भी करेगी। यह पूरी प्रक्रिया ‘रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल’ पर आधारित होगी यानी सरकार को इस पर कोई पैसा खर्च नहीं करना होगा। इससे होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा सरकार के खजाने में आएगा।
