महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में सियासी महासंग्राम, जानें कहां कौन मजबूत
January 14, 2026
महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में होने वाले चुनाव केवल स्थानीय निकायों की सत्ता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें 2029 की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है। यह चुनाव तय करेंगे कि शहरी महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी अपना वर्चस्व बनाए रख पाएगी या महाविकास आघाड़ी वापसी कर नया राजनीतिक संकेत देगी, अथवा क्षेत्रीय और स्थानीय ताकतें सत्ता संतुलन को नया रूप देंगी। राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं में 15 जनवरी को मतदान होगा, जबकि मतगणना 16 जनवरी को की जाएगी। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद यह मुकाबला शहरी सत्ता पर पकड़ को लेकर है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक 'सेमीफाइनल' के रूप में देख रहे हैं। कई नगर निगम लंबे समय से प्रशासक शासन में रहे हैं, ऐसे में बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच मतदाता पहली बार अपनी राय देने जा रहे हैं।
महाराष्ट्र में हो रहे इन स्थानीय निकाय चुनावों में एक ओर महायुति जिसमें भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) शामिल हैं, पूरी ताकत के साथ मैदान में है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) की महाविकास आघाड़ी कड़ा मुकाबला दे रही है। इसके अलावा मनसे, AIMIM, वंचित बहुजन आघाड़ी और कई स्थानीय आघाड़ियां अनेक शहरों में निर्णायक भूमिका निभाती दिख रही हैं। आइए, देखते हैं कि मुंबई से लेकर पुणे तक बड़े शहरों की क्या तस्वीर है
भाजपा शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। शिवसेना (UBT) मुंबई–ठाणे बेल्ट में अपना आधार बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। कांग्रेस को विदर्भ और मराठवाड़ा से वापसी की उम्मीद है, जबकि AIMIM और वंचित कई नगर निगमों में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। 29 महानगरपालिकाओं के ये चुनाव केवल स्थानीय सत्ता का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। क्या भाजपा शहरी महाराष्ट्र में अपना दबदबा कायम रखेगी, या महाविकास आघाड़ी नया राजनीतिक संदेश देगी, या फिर क्षेत्रीय ताकतें सत्ता संतुलन को नया रूप देंगी, इन सभी सवालों के जवाब जल्द ही सामने होंगे।
