मसौली/बाराबंकी। भगवान धन-दौलत के नहीं बल्कि भाव के भूखे होते हैं और उन्हें पाने के लिए तीर्थ स्थलों पर भटकने की आवश्यकता नहीं है। यदि घर में माता-पिता हैं तो उनकी सेवा से बढ़कर कोई पूजा नहीं है। उक्त विचार गुरुवार को चित्रकूट से पधारे कथा व्यास सुबोध कांत ने दशहरा बाग स्थित रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन व्यक्त किए।
कथा व्यास ने सुदामा चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा जी के पास भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करने के लिए केवल चार मुठ्ठी चावल थे, लेकिन भगवान ने उनकी सामग्री नहीं बल्कि उनके भाव को स्वीकार किया। उन्हीं चार मुठ्ठी चावलों के बदले भगवान ने सुदामा को दोनों लोकों की संपत्ति प्रदान कर दी।
उन्होंने संतों की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी संत का अपमान करना भगवान की दृष्टि में सबसे बड़ा अपराध है और जो भी ऐसा करता है, उसे उसका परिणाम अवश्य भुगतना पड़ता है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मोपदेश का रसपान किया। इस अवसर पर किरण वर्मा, संदीप वर्मा, मुकेश वर्मा, उत्तम, रामबरन यादव, विवेक अवस्थी, पंकज वर्मा, सुरेंद्र सिंह, विमल वर्मा, अशोक, आशीष वर्मा, कपिल, सचिन मौर्या, अंकित सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे मौजूद रहे।
