पीलीभीत। पराक्रम दिवस एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के शुभ अवसर पर मेरा युवा भारत के तत्वावधान में जिला युवा अधिकारी शिवम शर्मा के निर्देशन में डॉ. भीमराव अंबेडकर मिशन पब्लिक स्कूल, ललौरीखेड़ा में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकगण एवं युवा मंडल दल अध्यक्ष वीरपाल ने विद्यार्थियों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रेरक जीवन, उनके संघर्ष, साहस और देशभक्ति की गाथा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कुछ इतिहासकारों के अनुसार जब नेताजी ने जापान और जर्मनी से सहयोग लेने का प्रयास किया, तब ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1941 में उन्हें समाप्त करने के लिए अपने गुप्तचरों को आदेश दिए थे।उन्होंने आगे बताया कि 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल के सामने नेताजी ने ‘सुप्रीम कमांडर’ के रूप में सेना को संबोधित करते हुए “दिल्ली चलो!” का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर बर्मा, इम्फाल और कोहिमा में ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेनाओं के विरुद्ध मोर्चा लिया।
21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन किया, जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशों की सरकारों ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह इस अस्थायी सरकार को सौंपे, जिनका नेताजी ने नया नामकरण किया।वर्ष 1944 में आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों पर पुनः आक्रमण कर कुछ भारतीय क्षेत्रों को मुक्त कराया। कोहिमा का युद्ध (4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944) अत्यंत भीषण रहा, जिसमें जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा यह युद्ध एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो स्टेशन से नेताजी ने महात्मा गांधी के नाम प्रसारण जारी कर निर्णायक विजय हेतु उनका आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ मांगीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद बना हुआ है।कार्यक्रम में राजपाल, गौरव कुमार, वीरेश कुमार, पंकज कुमार, प्रदीप कुमार, सुनील कुमार, सुरेश पाल गंगवार तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य सत्यपाल आर्य सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति, त्याग और साहस की भावना को सुदृढ़ करना रहा।
