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अमेठीः रो पड़ी इंसानियत! बहुरानी ने थामा पीड़ितों का हाथ! जनसेवा मेरे लिए सत्ता नहीं, साँसों से जुड़ा धर्म है-शाम्भवी सिंह


अमेठी। ग्राम ढेमा उस दिन सिर्फ एक गाँव नहीं था वह सैकड़ों टूटती उम्मीदों के लिए आस बन गया। धुंधली आँखों से दुनिया को टटोलते बुजुर्ग, इलाज के अभाव में चुपचाप दर्द सहती माताएँ और भविष्य की चिंता में डूबे परिवार३ जब सती महारानी जन कल्याण ट्रस्ट का निःशुल्क नेत्र जाँच एवं जनकल्याण शिविर लगा, तो जैसे अँधेरे में पहली बार रोशनी ने दस्तक दी।जहाँ सेवा आँकड़ों से आगे निकल गई289 से अधिक ग्रामीणों की आँखों और शुगर की जाँचकृहर जाँच के साथ एक उम्मीद 22 जिंदगियाँ जिन्हें मोतियाबिंद ऑपरेशन के जरिये फिर से देखने का सपना मिला12 परिवार जिन्हें आयुष्मान कार्ड के रूप में इलाज का भरोसा मिला बच्चों और बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान लौटाने के लिए उपहार ‘बहुरानी’ नहीं, अपनों की बेटी शिविर की आयोजक और मुख्य अतिथि बहुरानी शाम्भवी सिंह न मंच पर रहीं, न दूरी में। वे जमीन पर बैठीं, काँपते हाथ थामे, बुजुर्गों की आँखों में झाँककर बोलीं “अब चिंता मत करना।”कई बुजुर्गों की आँखें भर आईं और शब्द अपने-आप निकल पड़ेकृ“बिटिया हो तो ऐसी३ जो दर्द पूछे भी और दूर भी करे।”एक वचन, जो राजनीति नहींकृआस्था है भावुक जनसंवाद में बहुरानी शाम्भवी सिंह ने कहा“जब तक समाज का आखरी व्यक्ति अँधेरे में खड़ा है, तब तक मेरा जीवन उजाले की खोज में रहेगा। जनसेवा मेरे लिए चुनाव नहीं, संकल्प है। कोई भी गरीब सिर्फ पैसे के कारण इलाज से वंचित न रहेकृयह मेरा वचन है।” सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब 22 मरीजों को बताया गया कि ऑपरेशन के बाद वे फिर से अपनों के चेहरे देख सकेंगे। आँखों में आँसू थे, होंठों पर दुआएँ।

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