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अलफुरकान ट्रस्ट का पूर्व अध्यक्ष सदीक खान गिरफ्तार


राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने राज्यभर में हलचल मचा दी है. बीकानेर के अलफुरकान एजुकेशनल ट्रस्ट (AET) के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद सदीक उर्फ सादिक खान की गिरफ्तारी न सिर्फ आर्थिक अपराधों की परतें खोल रही है, बल्कि यह जांच अब कट्टरपंथी नेटवर्क, विदेशी संपर्क, अवैध कारोबार और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की दिशा में भी आगे बढ़ चुकी है.

सदीक को जयपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे 06 दिसंबर तक तीन दिन की ED रिमांड पर भेज दिया. शुरुआती इनपुट और FIR की कई परतें खुलने के बाद यह गिरफ्तारी राजस्थान में आतंकी वित्तपोषण और कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है.

अलफुरकान एजुकेशनल ट्रस्ट, जिसके जरिए मस्जिद-ए-आयशा संचालित होती है पर लंबे समय से भारी भरकम कैश डोनेशन लेने के आरोप लग रहे थे. ED की जांच में सामने आया कि ट्रस्ट की ओर आने वाली धनराशि का कोई लेखा-जोखा तैयार नहीं किया जाता था, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह पैसा गया कहां?

ED का दावा है कि दान के पैसों का व्यक्तिगत उपयोग किया है. कट्टरपंथी संगठनों के संपर्कों में खर्च किया गया है. विदेशी यात्राओं और नेटवर्क विस्तार में इन फंडों का इस्तेमाल हुआ है. सामुदायिक और शैक्षिक उद्देश्यों के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी का जाल बुना गया है. ED का कहना है कि सदीक ट्रस्ट को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करता था—बाहर से धार्मिक और सामाजिक सेवा का चोला और अंदर छिपा कट्टरपंथ, अवैध फंडिंग और विदेशी नेटवर्क.

राजस्थान पुलिस की चार्जशीट में सदीक पर कई संगीन आरोप पहले से ही दर्ज हैं, जो इस प्रकार है, हत्या के प्रयास,अवैध हथियार रखना, फायरिंग की घटनाएं और आपराधिक गिरोहों से संपर्क. ED ने जब उसकी और उसके परिवार की बैंक स्टेटमेंट जांच किया तो सामने आया कि करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए है. कोई स्पष्ट आय स्रोत नहीं है. नकद जमा और निकासी की अनियमितता देखी गई. विदेशी यात्राओं के खर्च की कोई ठोस व्याख्या नहीं है. ये सभी बातें संदेह को और मजबूत करती हैं कि ट्रस्ट को व्यवस्थित रूप से अवैध पैसों के लिए ऑपरेट किया जा रहा था.

सदीक की गिरफ्तारी के बाद ED का ध्यान उसके विदेशी दौरों पर केंद्रित हो गया है. जांच में सामने आया कि बांग्लादेश में वह मो. सलीम उर्फ सौरभ वैद्य से मिला, जिसे MP ATS ने हिज्ब-उत-तहरीर से संबंधों के आरोप में पकड़ा था. जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के सदस्यों से संपर्क में था. नेपाल के रास्ते सीरिया जाने की कोशिश, लेकिन इमिग्रेशन ने रोक लिया. कतर और ओमान में भी कई संदिग्ध मुलाकातों के बारे में पता चला.

ED के अनुसार सदीक के पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था. फिर वह करोड़ों का लेनदेन कैसे कर रहा था? जांच में खुलासा हुआ कि जुआ और अवैध शराब कारोबार में संलिप्तता पाई गई. देशी हथियारों की खरीद-फरोख्त का मालूम चला है. तीन कट्टे और जिंदा कारतूस की बरामदगी हुई. सार्वजनिक मंचों पर भड़काऊ भाषण दिया गया और समुदायों के बीच तनाव फैलाने की कोशिश की गई. ED और स्थानीय पुलिस के इन संयुक्त निष्कर्षों ने केस को सिर्फ आर्थिक अपराध की सीमाओं से कहीं आगे ले जाकर राष्ट्र सुरक्षा के दायरे में ला दिया है

जांच एजेंसी के अनुसार समूह को ट्रस्ट की तरफ से लिए गए दान के पैसे मिले. इसके अलावा अवैध व्यापार और हथियार नेटवर्क की कमाई की गई. वहीं विदेशी संपर्कों से भी फंडिंग की गई. एक संदिग्ध वित्तीय तंत्र तैयार किया गया था, जिसका उपयोग कट्टरपंथी नेटवर्क और चरमपंथी संगठनों से जुड़ने में किया गया.

मोहम्मद सदीक की गिरफ्तारी से जो प्राथमिक तथ्य सामने आए हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है. राजस्थान की भौगोलिक स्थिति, भारत–बांग्लादेश–नेपाल के मार्गों की संवेदनशीलता और कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों को देखते हुए यह केस बेहद गंभीर माना जा रहा है. राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां इस बात का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं कि सदीक का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या राजस्थान के अन्य जिलों में भी ऐसे मॉड्यूल सक्रिय हैं.

अल फुरकान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद सदीक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित किया है कि धार्मिक-सामाजिक संगठनों के नाम पर भी अवैध पैसों और कट्टरपंथ का नेटवर्क पनप सकता है. अब पूरा मामला ED की जांच में है और आने वाले दिनों में कई और नाम, कई और लिंक और कई और विदेशी संपर्क सामने आ सकते हैं. यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि राजस्थान में कट्टरपंथी गतिविधियों और विदेशी नेटवर्क के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई साबित हो सकती है.

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