ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में छोड़ा आधा मीटर कपड़ा, 1.5 साल बाद ऑपरेशन से निकला
December 27, 2025
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में डॉक्टरों ने महिला की डिलीवरी के दौरान आधा मीटर कपड़ा उसके पेट में ही छोड़ दिया। जब उसे पेट में दर्द की शिकायत हुई तो उसके पेट में गांठ होने की बात कही गई। हालांकि, जब ऑपरेशन हुआ तो महिला के पेट से 1.5 मीटर कपड़ा निकला। इसके बाद भी अस्पताल महिला और उसके पति से झूठ बोलते रहे। अब जाकर गौतम बुद्ध नगर सीएमओ समेत 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
जिस हॉस्पिटल में महिला के पेट में कपड़ा छोड़ा गया था, उसके डॉक्टर पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर हुई है। मामला नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के बैक्सन अस्पताल का है। बैक्सन अस्पताल की डॉक्टर अंजना अग्रवाल, डॉक्टर मनीष गोयल, स्वामी, सीएमओ नरेंद्र कुमार, डॉक्टर चंदन सोनी जांच अधिकारी, डॉक्टर आशा किरन चौधरी जांच अधिकारी पर एफआईआर दर्ज हुई है।
पीड़िता अंशुल वर्मा ने बताया कि 14 नवंबर 2023 को डक्टर अंजना अग्रवाल ने वैक्सन हस्पिटल ग्रेटर नोएडा में डिलीवरी के लिए ऑपरेशन किया था। इस दौरान लगभग आधा मीटर कपड़ा उसके पेट में ही छोड़ दिया था। 16 नवंबर 2023 को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद महिला की तबीयत लगातार खराब रहने लगी और पेट में लगातार दर्द रहने लगा। पेट दर्द के कारण वह अपने गांव मुजफ्फरनगर चली गई। डक्टर ने अल्ट्रासाउंड और अन्य टेस्ट करने की सलाह दी। महिला ने मुजफ्फरनगर के आस्था हस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल, कई अस्पतालों में ऑपरेशन की जगह उभरी हुई गांठनुमा संरचना को दिखाया परंतु कोई फायदा नहीं मिला। 22 मार्च 2025 को तेज बुखार व बढ़ते पेट दर्द के कारण पीड़िता ग्रीन सिटी हस्पिटल डेल्टा 1 ग्रेटर नोएडा गौतमबुद्धनगर पहुंची। वहां उसे कुछ दवाइयां दे दी गई परंतु दर्द का मूल कारण अभी भी किसी को पता नहीं था। इसके बाद भी कई टेस्ट हुए, लेकिन रिपोर्ट सामान्य रही।
14 अप्रैल को कैलाश अस्पताल में महिला को पेट में गांठ के आधार पर ऑपरेशन की सलाह दी गई। 22 अप्रैल को ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने महिला के पेट से आधा मीटर कपड़ा निकाला। आपरेशन के दौरान कपड़ा निकाले जाने के फोटो व वीडियो भी महिला के पास हैं। ऑपरेशन टीम में आरोपी डॉक्टर अंजना अग्रवाल के पति मनीष गोयल भी थे। ऐसे में वह मामले को दबाने में लग गए। गौतम बुध नगर सीएमओ ने शिकायत मिलने के बाद दो महीने तक टाल-मटोल की। इसके बाद पीड़ित परिवार कोर्ट के पास पहुंचा और अब आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
