भाजपा, शिवसेना और एनसीपी में बनी सहमति, बावनकुले ने दी जानकारी
November 28, 2025
महाराष्ट्र में महायुती के तीनों दलों ने एक बड़ा फैसला लिया है। भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और एनसीपी तीनों पार्टियों ने मिलकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम फैसले को अंजाम दिया है, जिसके तहत निकाय चुनाव के पूर्व महायुती में शामिल तीनों घटक दल आपस में तोड़फोड़ नहीं करेंगे। तीनों पार्टियों ने फैसला किया है कि वे एक दूसरे के कार्यकर्ताओं को अपने दलों में प्रवेश नहीं देंगे। यह बात महाराष्ट्र के भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रभारी और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इंडिया टीवी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान कही है।
महाराष्ट्र में नगर परिषद एवं पंचायत के चुनाव 2 दिसंबर की तारीख को होने वाले हैं। इसमें तीनों दलो में गठबंधन नहीं हो पाया है। भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और एनसीपी अलग-अलग चुनाव लड़ रही है। हालांकि, जिला परिषद और महानगरपालिका में तीनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि नगर परिषद, पंचायत का चुनाव छोटे क्षेत्र का होता है, कार्यकर्ताओं का चुनाव होता है, उसका क्षेत्र छोटा होता है। जिला परिषद और महानगरपालिका का चुनाव भारतीय जनता पार्टी, एनसीपी और शिवसेना शिंदे सभी मिलकर लड़ेंगे।
चंद्रशेखर बावनकुले ने जानकारी दी है कि ऐसा फैसला किया गया है कि तीनों पार्टियां कार्यकर्ताओं को समझाने कि कोशिश करेंगी कि जिस पार्टी का कार्यकर्ता जहां है वहीं रहे। लोकल लेवल पर कभी-कभी गड़बड़ हो जाता है। इसलिए सभी ने मिलकर यह निर्णय लिया है। महाराष्ट्र में महायुती मजबूत है। चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि समन्वय समिति ने एक दूसरे के दलों में प्रवेश रोकने के लिए यह निर्णय लिया है। अब तीनों दल एक दूसरे के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को अपने-अपने दल में प्रवेश नहीं देंगे।
बीते दिनों महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुलाकात दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई थी। इस बारे में बावनकुले ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री शिंदे की मुलाकात किसी तरह की नाराजगी को लेकर नहीं, बल्कि महायुती की जीत की रणनीति और प्रशासकीय समन्वय के लिए थी। महाराष्ट्र बीजेपी के चुनाव प्रभारी बावनकुले ने कहा कि उनकी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुंबई में मुलाकात हुई थी। वह कहीं भी नाराज नहीं थे, एनडीए में नेता नियमित तौर पर एक दूसरे से मिलते रहते हैं। महायुती को 51% मतों से जीत दिलाने के लिए चर्चा हुई थी। एकनाथ शिंदे नाराजगी वाले नेता नहीं हैं, बड़े नेता हैं, इतनी बड़ी शिवसेना का उन्होंने गठन किया है।
