लखनऊ। बलरामपुर चिकित्सालय में एक दुर्लभ एवं जटिल जन्मजात विकृति वाले बच्चे की सफल शल्य चिकित्सा की गई। बच्चे में जन्म से ही पीठ के निचले हिस्से में स्पाइना बिफिडा ऑक्ल्टा के कारण विकसित छद्म पूंछ मौजूद था, जो बाहरी रूप से पूंछ के रूप में दिखाई देता था और किसी भी प्रकार के खिंचाव या हलचल पर दर्द उत्पन्न करता था।बच्चे के पिता सुशील कुमार और माता आरती देवी, ग्राम टिक्का रवा चैराहा, हीरे (उत्तर प्रदेश) निवासी हैं। उन्होंने बताया कि आसपास के किसी भी अस्पताल में इस जटिल जन्मजात स्थिति के ऑपरेशन को करने की हिम्मत नहीं दिखाई जा रही थी, जिससे परिवार अत्यंत चिंतित था। बाद में वे बलरामपुर चिकित्सालय के व्च्क् पहुंचे, जहाँ वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को स्वीकार किया।जांच एवं उपचार प्रक्रिया मेंऑपरेशन से पूर्व बच्चे की सभी आवश्यक जांचें की गईं,जिनमें डत्प्,ग्-त्ंल,अल्ट्रासाउंड,तथा संबंधित रक्त परीक्षण शामिल थे।
सभी रिपोर्ट सामान्य प्राप्त हुईं, जिसके बाद ऑपरेशन की तैयारी की गई।दिनांक 14ध्11ध्2025 को बलरामपुर चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर में बच्चे की शल्य चिकित्सा की गई। ऑपरेशन के दौरान छद्म पूंछ को सावधानीपूर्ण ढंग से हटाया गया, जो रीढ़ की हड्डियों (वर्टिब्रा) के बीच स्पाइनल कॉर्ड की झिल्लियों से घनी रूप से जुड़ा हुआ था।
शल्य चिकित्सा पूर्णतया सफल रही। बच्चा पीडियाट्रिक वार्ड 3 में स्वस्थ है। उसके दोनों पैर सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं, मूत्र एवं मल नियंत्रण सामान्य है तथा वह दूध एवं नरम आहार ले रहा है। बच्चे के परिवारजन अत्यंत प्रसन्न हैं और चिकित्सा टीम के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं।सर्जिकल टीम में डॉ. अखिलेश कुमार, वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक ,एनेस्थीसिया टीमडॉ. एस. ए. मिर्जाडॉ. एम. पी. सिंहनर्सिंग एवं सहायक स्टाफनिर्मला मिश्रा,अंजना सिंह,डॉ. मनीष वर्मा (इंटरन),राजू (वार्ड बॉय) रहे स इस शल्य क्रिया के बारे मे
निदेशक, बलरामपुर चिकित्सालय कृ डॉ. कविता आर्या ने बताया “बलरामपुर चिकित्सालय में उपलब्ध विशेषज्ञता और उन्नत सुविधाएँ हमें ऐसे दुर्लभ जन्मजात मामलों को सफलतापूर्वक संभालने में सक्षम बनाती हैं। यह ऑपरेशन हमारी बाल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और हमारे चिकित्सकों की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।”मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कृ डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया “यह एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण मामला था, जिसे हमारी टीम ने अत्यंत कुशलता के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी परिवार कठिनाई लेकर आए और संतोष लेकर वापस जाए। बलरामपुर चिकित्सालय ऐसी जटिल बाल शल्य चिकित्सा में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। चिकित्सा अधीक्षक कृ डॉ. देवाशीष शुक्ला ने कहा कि हमारी बाल शल्य टीम द्वारा इस जटिल टिश्यू मास को सुरक्षित रूप से हटाया जाना अत्यंत सराहनीय उपलब्धि है। हम बाल स्वास्थ्य सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार उत्कृष्ट परिणाम प्रदान कर रहे हैं।”
