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महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण पर बोला सुप्रीम कोर्ट-हमारी शक्तियों का इम्तिहान न लें, वरना..


महाराष्ट्र के आरक्षण से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 नवंबर, 2025) को चेतावनी दी है कि अगर 50 प्रतिशत रिजर्वेशन की सीमा का उल्लंघन हुआ तो वह स्थानीय निकाय चुनावों पर रोक भी लगा सकता है. कोर्ट का कहना है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग (OBC) का मिलाकर कुल रिजर्वेशन 50 परसेंट की कैप से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे समय पर यह चेतावनी दी है, जब निकाय चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार से शुरू हो रही है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया गया कि कुछ निकाय ऐसे हैं, जहां ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार कर दी गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के 6 मई के आदेश का उल्लंघन है.

कोर्ट ने आदेश में चुनाव आयोग को जुलाई, 2022 में आई जे के बांठिया आयोग की रिपोर्ट से पहले के ओबीसी निर्देशों का पालन करने को कहा था. याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि राज्य में जे के बंठिया कमिशन रिपोर्ट के आधार पर चुनाव करवाया जा रहा है, जिसमें ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत कोटा है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो रिजर्वेशन 70 प्रतिशत के भी पार पहुंच जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव में ओबीसी रिजर्वेशन पर उसके आदेश को प्रशासन ने गलत समझा है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि जे के बंठिया कमीशन रिपोर्ट का अदालत की ओर से परीक्षण किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोर्ट ऐसा नहीं चाहता कि चुनाव न हो, लेकिन वह 50 प्रतिशत आरक्षण के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं कर सकता है. महाराष्ट्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर बेंच ने मामले की सुनवाई 19 नवंबर के लिए तय कर दी है, लेकिन राज्य सरकार से कहा है कि वह 50 प्रतिशत की सीमा से आगे न बढ़े.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'अगर दलील यह है कि नामांकन शुरू हो गया है और अदालत को अपना काम रोक देना चाहिए, तो हम चुनाव पर रोक लगा देंगे. इस अदालत की शक्तियों का इम्तिहान न लें.' बेंच ने कहा, 'हमारा संविधान पीठ की ओर से निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को पार करने का कभी इरादा नहीं था. हम दो जजों वाली पीठ में बैठकर ऐसा नहीं कर सकते. बांठिया आयोग की रिपोर्ट अब भी कोर्ट में विचाराधीन है, हमने पहले की स्थिति के अनुसार चुनाव कराने की अनुमति दी थी.'

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि सोमवार है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के छह मई के आदेश का हवाला दिया, जिसने चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त किया था. जस्टिस बागची ने कहा, 'हम स्थिति से पूरी तरह अवगत थे. हमने संकेत दिया था कि बांठिया से पहले वाली स्थिति बनी रह सकती है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि सभी के लिए 27 प्रतिशत की छूट होगी? अगर ऐसा है, तो हमारा निर्देश इस अदालत के पिछले आदेश के विपरीत है. इसका मतलब यह होगा कि यह आदेश दूसरे आदेश के विपरीत होगा.'

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