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ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने उरी के हाइड्रो प्रोजेक्ट पर किया पहला हमला


भारत की तरफ से 6-7 मई 2025 की रात को शुरू किए गए बड़े सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था. भारत की यह सटीक कार्रवाई कुछ ही घंटों में प्रभाव दिखाने लगी. इसके जवाब में पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास अंधाधुंध गोलाबारी शुरू कर दी थी. इसी बीच पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के उरी क्षेत्र में स्थित उरी जलविद्युत परियोजना (UHEP-I और II) को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश की थी.

उरी जलविद्युत परियोजना LoC से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए पाकिस्तान का पहला प्रयास इसी संवेदनशील ऊर्जा प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाने का था. हालांकि, पाकिस्तान की यह कोशिश बुरी तरह नाकाम रही, क्योंकि उस वक्त प्रोजेक्ट की सुरक्षा में मौजूद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने पूरी रणनीति और बहादुरी के साथ सभी हमले विफल कर दिए.

हमले वाले दिन-रात हालात अत्यधिक तनावपूर्ण थे. ड्रोन हमले और गोलीबारी के बीच उरी परियोजना के आसपास रहने वाले लोग भयभीत थे. कई लोग अपने घरों में फंसे हुए थे, लेकिन CISF के जवानों ने जोखिम उठाकर घर-घर जाकर महिलाओं, बच्चों और NHPC कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया. CISF के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के हमले तेज और अनियंत्रित थे. ड्रोन लगातार प्रोजेक्ट की दिशा में उड़ान भर रहे थे और परियोजना को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन डिप्टी कमांडेंट रवि यादव के नेतृत्व में जवानों ने न केवल दुश्मन ड्रोन मार गिराए, बल्कि हथियारों और शस्त्रागार को भी सुरक्षित कर लिया ताकि किसी भी तरह की क्षति न हो.

रातभर जारी गोलाबारी के बावजूद जवान डटे रहे और NHPC के दोनों जलविद्युत संयंत्रों को बिल्कुल सुरक्षित रखा. इस घटना ने दिखा दिया कि भारत के राजनीतिक प्रतिष्ठान चाहे सीमा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हों, लेकिन उनकी सुरक्षा में लगी सेनाएं हर आपातकाल के लिए पूरी तरह तैयार रहती हैं.

6 मई की उस ऐतिहासिक रात को अद्भुत साहस दिखाने वाले 19 CISF कर्मियों को मंगलवार (25 नवंबर 2025) को नई दिल्ली स्थित CISF मुख्यालय में आयोजित समारोह में महानिदेशक (DG) Disc से सम्मानित किया गया. राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की जान बचाने में इन जवानों की भूमिका असाधारण रही. यह सम्मान दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय बलों की तैयारियां, अनुशासन और निर्णय क्षमता किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब देने में सक्षम है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उरी क्षेत्र में तैनात अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की पहली जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य जलविद्युत परियोजना थी, लेकिन भारतीय सेना और CISF पहले से तैयार थे. इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत था और जैसे ही पाकिस्तानी गोलीबारी बढ़ी, जवानों ने तेजी से काउंटर एक्शन लिया. अधिकारी ने यह भी बताया कि यदि उस रात ड्रोन हमले को समय पर निष्क्रिय नहीं किया जाता तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता था, क्योंकि इन ऊर्जा परियोजनाओं का महत्व केवल कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए काफी जरूरी है

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