आगरा। एत्मापुर रेंज के रायपुर गांव में ग्रेटर न्यू आगरा के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य के दौरान दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को बिना किसी वैध अनुमति के उखाड़ फेंकने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के निर्देशों पर किसानों के खेतों में खड़े हरे वृक्षों को बुलडोजर चलाकर समाप्त कर दिया गया।
किसान बहादुर सिंह के खेत से 15, पवन देवी पत्नी संतोष के 17, श्रीमती पत्नी रामप्रकाश के 20, बांकेलाल के 30 और किसान बनी सिंह के खेत से 14 हरे वृक्षों को उखाड़ कर उनकी “हत्या” की गई। कुल मिलाकर 96 हरे पेड़ों की अवैध कटाई का आरोप लगाया गया है।
वहीं वन विभाग, आगरा के अधिकारी इस मामले में मात्र 17 पेड़ों को उखाड़े जाने की बात स्वीकार कर रहे हैं, जिसको लेकर विभाग पर आरोप है कि वह गुनहगारों को बचाने की कोशिश कर रहा है। विभाग ने केवल बुलडोजर चालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर दी, जबकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बिना विभागीय अधिकारियों के आदेश और मौजूदगी के कोई चालक ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकता।
पर्यावरणविद् डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हरे वृक्षों को काटने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में उसके आदेशों की अनदेखी कर पेड़ों को खत्म करना गंभीर अपराध है और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, जो टीटीजेड की भी संयोजक सचिव हैं, उनके अधीन रहते हुए इतनी बड़ी पर्यावरणीय क्षति होना विभागीय कार्यशैली और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
