प्रतापगढ़। समन्वय उपासिका संघ के तत्वाधान में आयोजित जनपद के सई नदी के तट पर स्थित सुगतानन्द बुद्ध विहार पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रियदर्शी सम्राट अशोक विजय दशमी श्रद्धा,संकल्प व उल्लास के साथ मनाया । इस अवसर पर पावन बुद्ध विहार में बड़ी संख्या में पावन भिक्खु संघ के आगमन पर उपासिकाओं व श्रद्धालुओं द्वारा भोजन दान, संघदान के साथ त्रिशरण,पंचशील ,परित्राण पाठ, वृक्षारोपण व पालि भाषा के संवर्धन सम्मान का कार्यक्रम किया गया ।
पावन संघ का नेतृत्व कर रहे भिक्खु धम्मदीप ने अपने गौरवशाली संस्कृति को जानने उन संस्कारों से जुड़ने पर बल देते हुए सम्राट अशोक महान के कलिंग युद्ध के बाद धम्म दीक्षा के बाद वैभवशाली राष्ट्र के निर्माण व भगवान बुद्ध के विचार से विश्व शांति में सम्राट अशोक के हृदय परिवर्तन व भगवान् बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा किया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बहन लीलावती ने कहा कि प्रियदर्शी सम्राट अशोक महान ने भंते मोग्गिलिपुत्ततिष्य से धम्म की शिक्षा प्राप्त की थी। इस धम्म दीक्षा के बाद, अशोक ने अपनी प्रजा का दिल बल या शस्त्र के माध्यम से नहीं बल्कि करुणा, मुदिता व प्रेम के माध्यम से जीतने की प्रतिज्ञा की।
संचालन करते हुए राकेश कनौजिया ने कहा कि ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया और यूरोप इजरायल -फिलिस्तीनदृ ईरान तथा रूस- यूक्रेन के बीच युद्धों से त्रस्त हैं, युद्ध की निरर्थकता, जैसा कि अशोक ने कलिंग युद्ध के दौरान देखा था, प्रासंगिक रूप से उभर कर सामने आती है और एक संदेश विश्व शान्ति के रूप में कार्य करती है।
इसके पूर्व पावन संघ के आगमन पर उपासक वेद प्रकाश,सुशील कुमार ष्दद्दूष् व सुरेन्द्र विमल के नेतृत्व में आंबेडकर चैराहे पर भव्य स्वागत किया गया । तत्पश्चात पावन संघ ने नगर के मुख्य मार्ग से शांति ,करूणा,मैत्री का संदेश देते हुए चैंक घंटाघर होते हुए पदयात्रा कर सुगतानन्द बुद्ध विहार में समन्वय सेवा संस्थान उपासिका संघ द्वारा आयोजित भोजनदान, संघदान व धम्मदेशना में अपनी मंगल मैत्री का संदेश दिया । 2 अक्टूबर के इस पुनीत अवसर पर बुद्ध विहार वन विभाग के सहयोग से वृक्षारोपण का पर अभियान चलाकर पर्यावरण का संदेश भी दिया गया ।
सुरेन्द्र कुमार विमल ने कहा कि इसी दिन 14 अक्टूबर 1956 को आश्विन मास विजयादशमी पर, डॉ. भीम राव अंबेडकर और उनके साथ लाखों बौद्ध अनुयायी के साथ बौद्ध धर्म अपना गौरवशाली संस्कृति व अध्यात्मिक दर्शन को पुनर्स्थापित किया इसलिए इस ऐतिहासिक दिन को प्रतिवर्ष ष्धम्म चक्र अनुवर्तन दिवसष् के रूप में भी मनाया जाता है ।
इस पावन अवसर पर विगत 17 सितंबर आनागरिक धम्मपाल जयंती से शुरू हुए ष्पालि पखवाड़ा का पालि भाषा में नेट परीक्षा में सफल अभिनेष सरोज व पालि भाषा संवर्धन में विशिष्ट योगदान के लिए आचार्य डा. शिव मूर्ति लाल मौर्य, आचार्य सुमन चंद्रा, अभिनेष सरोज, बसंत लाल मौर्य सम्मानित व आचार्य सुभाष चंद्रा द्वारा ष्पालि प्रबोधनष् के साथ सुत्त संगायन कर ष्पालि पखवाड़ेष् का समापन किया गया। आभार उपासिका अंजनी अवधेश व अनीता बौद्ध द्वारा संयुक्त रूप से व्यक्त किया गया ।
इस अवसर पर श्रीराम उमर वैश्य,इं०श्वेता प्रभात,इं. राम अचल मौर्य,उदयवीर सिंह, शोभा कनौजिया, शशि विमल,डा विजय निर्मला सरोज, संजय रंजू बौद्ध, रामप्यारी, सरिता कुमारी, पुष्पा परी, मकदूम, सुनीता,मंजू राकेश, राम लल्ली मौर्य,वेद प्रकाश, खुशबू यादव,अंजलि, पन्ना लाल, सुदामा,हरिकेश बौद्ध, जीतेन्द्र यादव, पारुल,विशाल बौद्ध,ज्ञानेश मौर्य,लक्ष्मी, मधुबाला, अशोक उमा,उमेशचंद्र, दिनेश,संतोष शशि,एस. पी. सिंह लोहिया, ललितमित्रा, शाश्वत विमल,सुशील कुमार ष्दद्दूष्, राम सजीवन सरोज,राम लखन,विजय शंकर,आरवि, प्रियांशु, संजय दीपशिखा, मखदूम प्रसाद, राज किशोर विमल,पुष्पा,माया लता, आरती, दुर्गावती, खुशबू,प्रमोद प्रखर, वीनू मौर्य, ज्ञानेश्वर सिंह, देवंशी, ईस्वी,पारुल,मंजू, आचार्य राजीव अनीता,नंदलाल,कमलेश, शिवम् यादव, अनुराग भारतीय,रामबरन,उदयराज, राकेश, संतलाल, राजेन्द कुमार बौद्ध आदि।
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