वैसे तो हर महीने में एक पूर्णिमा तिथि होती है लेकिन सभी में कार्तिक पूर्णिमा का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन व्रत रखने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। वहीं इस पूर्णिमा पर दीपदान (Purnima Par Deep Daan) का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई लोग इस पूर्णिमा पर 365 बाती का दीपक (365 Baati Ka Diya) जलाते हैं। कहते हैं इससे साल भर की पूजा का फल एक साथ प्राप्त हो जाता है। इस दिन देव दिवाली (Dev Diwali 2025) और गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti) भी मनाई जाती है। वहीं कुछ लोग इस दिन तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) भी कराते हैं। चलिए जानते हैं इस साल कार्तिक पूर्णिमा कब पड़ रही है।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 कब है
कार्तिक पूर्णिमा - 5 नवंबर 2025, बुधवार
पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय - 05:11 PM
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 04 नवम्बर 2025 को 10:36 PM बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 05 नवम्बर 2025 को 06:48 PM बजे
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान कैसे करें
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों में स्नान करके दीप जलाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर आपके लिए इस दिन नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें और इसके बाद दीपदान करें। इस दिन तुलसी के पौधे के नीचे, मंदिर में और घर के आंगन में दीप जरूर जलाना चाहिए। इसके अलावा इस दिन 365 बाती का दीपक जलाने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी से आरम्भ होने वाले तुलसी-विवाह उत्सव का समापन भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है। कई भक्तगण कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराते हैं। इसके अलावा इस दिन भीष्म पंचक व्रत का भी समापन हो जाता है।
पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय - 05:11 PM
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 04 नवम्बर 2025 को 10:36 PM बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 05 नवम्बर 2025 को 06:48 PM बजे
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान कैसे करें
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों में स्नान करके दीप जलाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर आपके लिए इस दिन नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें और इसके बाद दीपदान करें। इस दिन तुलसी के पौधे के नीचे, मंदिर में और घर के आंगन में दीप जरूर जलाना चाहिए। इसके अलावा इस दिन 365 बाती का दीपक जलाने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी से आरम्भ होने वाले तुलसी-विवाह उत्सव का समापन भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है। कई भक्तगण कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराते हैं। इसके अलावा इस दिन भीष्म पंचक व्रत का भी समापन हो जाता है।
