पीलीभीत। जिले के बीसलपुर ब्लॉक का अहिरबाडा मजरा दुबा गांव इस वक्त “विकसित भारत” के खोखले दावों का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है। बरसात की हर बूंद यहां के लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि आफत लेकर आती है। गांव का मुख्य रास्ता, जो कभी लोगों के आने-जाने का जरिया था, अब पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो चुका है। घुटनों तक कीचड़, पानी से लबालब गड्ढे, और फिसलनभरी मिट्टी कृ यह सब मिलकर इस रास्ते को किसी दलदली जंगल से कम नहीं बनाते। एक बीमार बुजुर्ग को उनके परिजन चारपाई पर उठाकर गांव से बाहर ले जा रहे थे, क्योंकि दलदल में कोई वाहन फंस जाता, और पैदल चलना जान पर खेलना होता। यह दृश्य सिर्फ भावनाओं को झकझोरने वाला नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नाकामी का जीवंत सबूत है।गांव के लोग खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि ग्राम प्रधान राम कन्या और सचिव सचिन कुमार ने विकास कार्यों के नाम पर भारी भरकम घोटाला किया है। सरकारी फंड आया, कागजों पर योजनाएं बनीं, लेकिन जमीन पर न सड़क बिछी, न जल निकासी की व्यवस्था हुई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखता है कि किस तरह गांव का रास्ता दलदल में डूबा है और लोग उसमें फंसे हुए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उनकी आवाज प्रशासनिक गलियारों में कहीं गुम हो गई। यह सिर्फ एक गांव का मामला नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है जिसमें “विकास” के चमकते वादे जमीनी हकीकत की धूल में मिल जाते हैं।अब ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी हैकृअगर जल्द ही पक्की सड़क और जल निकासी की पुख़्ता व्यवस्था नहीं हुई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि उस आक्रोश की गूंज है जो बरसों की उपेक्षा, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती से उपजा है।अहिरबाडा मजरा दुबा गांव का यह दलदल केवल बारिश का पानी नहीं समेटे हुए हैकृयह हमारे सिस्टम की लापरवाही, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का भी गंदा प्रतिबिंब है। जब तक इस दलदल को सुखाने के लिए ईमानदारी और जवाबदेही की धूप नहीं निकलेगी, तब तक यहां के लोग विकास के सपनों में भी सिर्फ कीचड़ ही देखेंगे।
