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लखनऊः जब आर डब्ल्यू ए अवैध तो अनुबंध कैसे हो गया वैध! गर्दन फंसती देख कमेटी और ठेकेदार के बीच का मामला बता रहे अधिकारी


चिनहट खंड अंतर्गत पार्श्वनाथ  सोसायटी का मामला दिन पर दिन उलझता जा रहा है एक करोड़ 69 लाख रुपए का काम निजी ठेकेदार से कराए जाने के मामले में भ्रष्टाचार की परतें उजागर होने लगी है विभागीय अधिकारियों एवं ठेकेदार की मिली भगत से सोसाइटी में रहने वाले कुछ लोगों को आगे कर शीर्ष प्रबंधन सिर्फ प्रस्ताव पर  स्वीकृति लेने का काम किया किसी भी विभागीय मंत्री अथवा प्रशासनिक मुखिया द्वारा जन सामान्य के प्रतिनिधिमंडल को तत्काल संतुष्ट करने के क्रम में नियमानुसार कार्य कराए जाने की संस्तुति कर दी जाती है पहला मुकाम हासिल करते ही अधिकारियों ने शुरू कर दिया खेलमंत्री की मोहर लगते ही  अधिकारियों ने झटपट   15ः सुपरविजन चार्ज जमा कराकर ठेकेदार को कार्य करने की अनुमति दे दी नियम विरुद्ध कार्य करने में फसेंगे अधिकारीचांदी के सिक्कों की चाहत में अधिकारियों ने नियम कानून ताक पर रख दिए जिस ठेकेदार एवं आर डब्ल्यू ए के मध्य अनुबंध की बात की जा रही है वह अस्तित्व में ही नहीं है । डिप्टी रजिस्टार चित फंड एंड सोसाइटी द्वारा कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमिताओं एवं अन्य अवैधानिक कृत्यों से असंतुष्ट होते हुए  वर्ष 2023 में गंभीर टिप्पणी करते हुए संपूर्ण पत्रावली पेश करने को कहा वरिष्ठ लेखा परीक्षक विश्व प्रकाश सिंह द्वारा  अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लगाए गए आरोपो की पुष्टि करते हुए वांछित प्रपत्र उपलब्ध न कराये जाने संबंधी रिपोर्ट कार्यालय डिप्टी रजिस्ट्रार चिट फंड एंड सोसाइटी को सौंप दी । गौरतलब है सोसाइटी निबंधन कार्यालय   के अभिलेखों में क्रमांक संख्या 557 पर दर्ज  सोसायटी को वर्ष 2021 में अगले 5 वर्षों के लिए कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया थ परंतु अनेकों प्रकार की शिकायतों एवं उस पर प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आर डब्ल्यू ए के कामकाज पर रोक लगा दी गई तथा तीन सदस्यीय संचालन समिति गठित की गईजिन सदस्यों ने प्रस्ताव पर संस्तुति हासिल की वह कमेटी के सदस्य ही नहीं वहीं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन सदस्यीय संचालन समिति को रजिस्ट्रार द्वारा सीमित अधिकार दिए गए जिन में स्वैच्छिक वित्तीय आय व्यय पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई। शीर्ष प्रबंधन से मिलने और संस्तुति प्राप्त करने वाले अजय शर्मा तथा पुष्पेंद्र भारती दोनों ही महानुभाव संचालन समिति के सदस्य नहीं हैै। परंतु विभाग के अधिकारियों एवं आरके कंस्ट्रक्शन कंपनी के अमित पाठक  द्वारा निजी हितों की पूर्ति हेतु इन लोगों से अनुबंध कर लिया गया वित्तीय  प्राप्ति पर रोक के कारण ठेकेदार ने विभाग की रसीदों का किए इस्तेमालपूर्व में मांगे गए प्रपत्र प्रस्तुत न करने तकसंचालन समिति द्वारा किसी भी प्रकार का नकदी अथवा अन्य स्रोतों से धनराशि प्राप्त करने पर रजिस्टार द्वारा रोक लगाई गई थीइस समस्या से निजात पाने के लिए ठेकेदार अमित पाठक द्वारा फर्जी रूप से मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की रसीधे छपवाई गई और अपनी मोहर लगाकर लोगों से लाखों रुपए डकारे गए ।

2 किलो वाट का मामूलीसंयोजन देने के दौरान आधार कार्ड में फोटो स्पष्ट न होने किसी भी प्रकार का नाम में त्रुटि  होने पर आवेदन पर क्वेरी लगाने वाला विभाग विभागीय छवि धूमिल होने पर भी धृतराष्ट्र बना रहा पैसा वसूलने वाले ठेकेदार पर किसी प्रकार की रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई गई ।

किसी भी विभाग में कार्य करने के लिए ठेकेदार को लाइसेंस  निर्गत किया जाता है जिसकी प्रक्रिया के दौरान उस पर किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला न पाए जाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाता हैवहीं सूत्रों की माने तो अपनी बचत के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा गुपचुप तरीके से ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज करने की तहरीर थाने पर दी गई थी  परंतु मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया।

बड़ा सवाल यह है यदि किसी आरोपी पर आपराधिक कृत्य करने का आरोप है तो फिर उसे कार्य करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।

वही पीड़ित आवंटियों द्वारा बताया गया मामले का निराकरण न होने पर उच्च न्यायालय मे मामला दाखिल किया गया कोर्ट द्वारा तल्ख टिप्पणी के साथ ही अग्रिम आदेशों तक कार्य न करने की हिदायत दी गई थी एवं शीघ्र ही उसे पर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया था ।

मामला कोर्ट में विचाराधीन होने की सूचना पर रात दिन युद्ध स्तर पर कार्य चालू कर दिया गया इसके शीघ्र पूर्ण होने की संभावना है ।

वही ठेकेदार तथा विभागीय अधिकारियों द्वारा मीटर बदलने के नाम पर लगभग 15000 रुपए प्रति उपभोक्ता वसूले जा रहे हैं जबकि पूरे प्रदेश में मीटर बदलने के दौरान कहीं से भी किसी प्रकार का पैसा लिए जाने का आदेश नहीं है।


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