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जज कैशकांड : सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका


इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. जस्टिस वर्मा ने अपने घर पर कैश मिलने के मामले की जांच के लिए इन हाउस कमेटी के गठन को चुनौती दी थी साथ ही, उन्हें पद से हटाने की चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की सिफारिश का भी विरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट दोनों ही बातों को कानूनी रूप से सही कहा है.

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का आचरण भरोसा जगाने वाला नहीं है. उन्होंने पहले इन हाउस कमेटी का विरोध नहीं किया. कमेटी की जांच में शामिल भी हुए, लेकिन जब कमेटी की रिपोर्ट खिलाफ आ गई, तब कमेटी को अवैध बताने लगे.

कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के लिए पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी की दलीलों के आधार पर 6 सवाल तय किए और उनका फैसले में उत्तर दिया :-

1. याचिका सुनवाई के योग्य नहीं

2. इन हाउस कमेटी का गठन कानूनी रूप से वैध

3. याचिकाकर्ता के किसी मौलिक अधिकार का हनन नहीं हुआ

4. जले हुए कैश का वीडियो अपलोड करना सही नहीं था, लेकिन याचिकाकर्ता ने इसका पहले विरोध नहीं किया, उसने कमेटी की कार्यवाही में हिस्सा लिया.

5. चीफ जस्टिस का राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को रिपोर्ट और सिफारिश भेजना सही था. ऐसा करने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं था.

6. याचिकाकर्ता जो भी कानूनी प्रश्न उठाना चाहता है, उसे भविष्य में किसी उपयुक्त कार्रवाई के जरिए उठा सकता है.

ध्यान रहे कि सुनवाई के दौरान जजों ने यह भी कहा था कि अब मामला संसद के पास है. संसद स्वतंत्र रूप से अपना काम करेगी. वह सम्मानित और जानकर न्यायविदों की नई कमेटी बनाएगी. वह नए सिरे से तथ्यों को देखेगी.

14 मार्च, 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली के घर पर आग लगी थी. उस समय वह दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे. आग बुझने के बाद पुलिस और दमकल कर्मियों को वहां बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश दिखा. सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने 22 मार्च को मामले की जांच के लिए 3 जजों की कमेटी बनाई. कमेटी ने 4 मई को सौंपी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दुराचरण का दोषी कहा. 8 मई को चीफ जस्टिस ने रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी और कार्रवाई की सिफारिश की.

गुरुवार, 7 अगस्त को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने वकील मैथ्यूज नेदुम्परा की याचिका भी खारिज कर दी. नेदुम्परा ने जस्टिस यशवंत वर्मा के ऊपर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 2 बार नेदुम्परा की इस तरह की याचिका को खारिज किया था. उन्होंने तीसरी बार याचिका दाखिल की थी.

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