- पराली प्रबंधन के लिए जनपद व तहसील स्तर पर बनेंगे 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, शिकायतों की होगी निगरानी।
- पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना, दो एकड़ से कम भूमि पर 5,000 और पांच एकड़ से अधिक पर 30,000 तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति का प्रावधान
अमेठी। जनपद में फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी शशांक चैधरी एवं पुलिस अधीक्षक सरवणन टी ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी निगरानी, जनजागरूकता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करने के साथ ही जनपद में ऐसी घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा मिट्टी की उर्वरता और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करें और उन्हें पराली जलाने के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दें। विशेष रूप से उन गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए, जहां पिछले वर्ष पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं। संबंधित उपजिलाधिकारी ऐसे गांवों में बैठक आयोजित कर किसानों को पराली के उचित निस्तारण के लिए प्रेरित करें।
जिलाधिकारी ने उप कृषि निदेशक को जनपद स्तर पर इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा सभी उपजिलाधिकारियों को तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये कंट्रोल रूम 24 घंटे क्रियाशील रहें और पराली प्रबंधन से संबंधित शिकायतों की नियमित निगरानी करते हुए प्राप्त सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके लिए आवश्यक कर्मचारियों की ड्यूटी भी निर्धारित की जाए, ताकि पराली जलाने की किसी भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जा सके। डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए विभागीय समन्वय के साथ लगातार निगरानी रखी जाए। किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उपयोगी प्रबंधन के विकल्पों से अवगत कराते हुए उन्हें पराली जलाने के बजाय उसका उचित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए।
जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि किसानों से समन्वय स्थापित कर उनके खेतों से पराली एकत्र कर अधिक से अधिक मात्रा में निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित कराई जाए। उन्होंने कहा कि पराली का उपयोग गोशालाओं में पशुओं के चारे तथा बिछौने के रूप में भी किया जा सकता है। इससे जहां पराली के उचित निस्तारण में मदद मिलेगी, वहीं गोशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए भी इसका उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में जिलाधिकारी ने कंबाइन हार्वेस्टर संचालकों से समन्वय स्थापित कर उनके मोबाइल नंबर संकलित करने तथा उन्हें धान कटाई के दौरान सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का अनिवार्य रूप से उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल कटाई के समय निर्धारित मानकों का पालन कराया जाए, जिससे खेतों में फसल अवशेषों के निस्तारण में सुविधा हो और पराली जलाने की आवश्यकता न पड़े। इस दौरान उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संचालित फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत विभिन्न कृषि यंत्रों को चिन्हित किया गया है। योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जबकि एफपीओ एवं पंजीकृत कृषक समितियों को फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य है। यह यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर से जुड़कर फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैला देता है, जिससे फसल अवशेषों के प्रबंधन में सुविधा होती है।
बैठक में अधिकारियों को अवगत कराया गया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। यदि किसी किसान द्वारा पराली जलाए जाने की पुष्टि होती है, तो निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली की जाएगी। इसके तहत दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए ₹5,000, दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए ₹10,000 तथा पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए ₹30,000 तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।
पुलिस अधीक्षक सरवणन टी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी बीट कांस्टेबलों को सतर्क रखा जाए और क्षेत्र भ्रमण के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर विशेष नजर रखी जाए। ग्राम प्रहरियों को भी सक्रिय करते हुए निर्देशित किया जाए कि गांव में कहीं भी पराली जलाने की घटना की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। उन्होंने कहा कि पुलिस, राजस्व एवं कृषि विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा आवश्यकता के अनुसार ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की जाए। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पराली प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए किसानों को जागरूक करने, वैकल्पिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने तथा पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से निर्वहन करें, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फसल अवशेषों का उपयोगी प्रबंधन भी किया जा सके। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ज्योति सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह निरंजन, समस्त उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
