सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों की जांच शुरू, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर होगी वैधानिक कार्रवाई
सोनभद्र, 29 अक्टूबर। अपर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र सुश्री मेविस टाक को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही भ्रामक पोस्टों का सोनभद्र पुलिस ने खंडन किया है। पुलिस के अनुसार, कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा 28 अक्टूबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायालय कक्ष संख्या 49 में हुई कार्यवाही के संदर्भ में एएसपी मेविस टाक का चित्र साझा कर तथ्यहीन पोस्ट प्रसारित की गई हैं। इन पोस्टों पर की गई कुछ टिप्पणियों में उनके प्रति अमर्यादित एवं आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है।
सोनभद्र पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि उक्त तिथि को संबंधित प्रकरण में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र की व्यक्तिगत उपस्थिति निर्धारित थी, लेकिन अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण वह उपस्थित नहीं हो सके। इस प्रकरण से अपर पुलिस अधीक्षक मेविस टाक का कोई संबंध नहीं है। ऐसे में उन्हें न्यायालयीन कार्यवाही से जोड़कर प्रस्तुत करने वाली पोस्ट तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं।
पुलिस ने कहा कि बिना तथ्यात्मक आधार के किसी व्यक्ति को किसी प्रकरण से जोड़ना तथा उसके विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां प्रसारित करना अनुचित है। इससे संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित होने के साथ-साथ समाज में भ्रामक सूचनाओं का प्रसार भी होता है।
सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान में जुटी पुलिस
मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित सोशल मीडिया पोस्टों और टिप्पणियों की जांच की जा रही है। पुलिस संबंधित हैंडल्स एवं उपयोगकर्ताओं की पहचान करने के साथ ही उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। जांच में प्राप्त तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध प्रचलित विधिक प्रावधानों के तहत नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अपुष्ट सूचनाएं साझा न करने की अपील
सोनभद्र पुलिस ने आमजन से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सूचना पर विश्वास करने या उसे साझा करने से पहले आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों से उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करें। अपुष्ट और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने तथा किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां करने से बचें। ऐसी सामग्री की जानकारी पुलिस के आधिकारिक माध्यमों पर दें, ताकि तथ्यों का सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
