प्रतापगढ़/बाबागंज। मानदेय में विसंगतियों और लगातार उपेक्षा से नाराज आशा कार्यकत्रियों का गुस्सा सोमवार को सीएचसी परिसर में फूट पड़ा। अपनी मांगों को लेकर लामबंद आशा कार्यकत्रियों और आशा संगिनियों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगी। आशाओं के हड़ताल पर रहने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित रहीं।
प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकत्रियों ने सरकार पर भेदभाव और सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, शिक्षामित्रों और चैकीदारों के मानदेय में बढ़ोतरी की जाती है, लेकिन आशाओं की समस्याओं और मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें उनका वाजिब हक नहीं मिल रहा है।आशाओं ने मांग की कि उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और उनके मानदेय में हर साल 20 प्रतिशत तक की वृद्धि सुनिश्चित की जाए। प्रसव कक्ष में प्रवेश की अनुमति देने के साथ प्रत्येक विजिट पर 700 रुपये भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा किसी आशा कार्यकत्री की मृत्यु होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को मृतक आश्रित के तहत नौकरी और परिवार को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग भी उठाई।आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। सरकार की इस अनदेखी से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है। धरना-प्रदर्शन के बाद आशाओं ने सीएचसी अधीक्षक को सरकार के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेताया कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे पीछे हटने वाली नहीं हैं।
प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष आशा सिंह, शांति तिवारी, आशा यादव, शोभा यादव, सीमा मौर्य, कंचन पांडे, लाली सिंह, मालती सिंह, बिंदु सिंह, निशा यादव संगिनी, अलका पाण्डेय संगिनी, नीतू सिंह समेत बड़ी संख्या में आशा कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।
