लखनऊ। उच्च शिक्षा के भविष्य पर चर्चा हेतु संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देते हुए, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ ने आज वाराणसी के होटल रेडिसन में ‘जयपुरिया हायर एजुकेशन लीडरशिप समिट - प्रणेता 2026’ का समापन किया। सम्मेलन में क्षेत्र से जुड़े एकेडमिक लीडर्स ने अपने विचार साझा किए और भविष्य के लिए तैयार संस्थानों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया स बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वाइस चांसलर प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन में शिरकत की। उनके साथ वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के वरिष्ठ एकेडमिक लीडर्स भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि संस्थान तकनीकी प्रगति और वैश्विक चुनौतियों के अनुसार कैसे अपने पाठ्यक्रम में बदलाव ला सकते हैं, किस तरह शैक्षणिक जगत में आपसी सहयोग को मजबूत बना सकते हैं, तथा किस तरह लर्निंग को उद्योग की बदलती जरूरतों तथा छात्रों की रोजगार क्षमता के अनुरूप ढाल सकते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ के डीन (एकेडमिक्स) डॉ. हेमेंद्र गुप्ता ने स्वागत संबोधन दिया तथा मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने भी सभा को सम्बोधित किया।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वाईस चांसलर प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा, “उच्च शिक्षा संस्थानों को एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। व्यवस्थित सहयोग से ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुभवों को साझा करने और एक-दूसरे की खूबियों का लाभ उठाने के अवसर उत्पन्न होते हैं। बदलती शैक्षणिक और सामाजिक जरूरतों के बीच जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ ऐसे कनेक्टेड इकोसिस्टम के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जहाँ सामूहिक सोच संस्थानों को मजबूत बनाने और छात्रों को लर्निंग के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में मदद करती है।”
इस साझा दृष्टिकोण के महत्व पर जोर देते हुए, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ के डीन (एकेडमिक्स) डॉ. हेमेंद्र गुप्ता ने कहा, “जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ में, हमारा मानना है कि उच्च शिक्षा का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि संस्थान कैसे अपनी साझा सीख को समुदायों के लिए अनुकूल परिणामों में बदल सकते हैं। प्रणेता 2026 के माध्यम से, हमारा उद्देश्य ऐसी बातचीत को बढ़ावा देना है जो केवल विचारों के आदान-प्रदान से आगे बढ़कर शिक्षण पद्धतियों को मजबूत करे, फैकल्टी के विकास में सहयोग दे और छात्रों को लर्निंग का बेहतर अनुभव प्रदान करे। इस यात्रा में शिक्षकों को सम्मानित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका विकास ही अंततः शिक्षण संस्थानों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को तय करता है।”
इसके बाद दो पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा, “अगले दशक के लिए उच्च शिक्षा की नई परिकल्पना” का संचालन डॉ. गुप्ता ने किया, जो जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ में फाइनेंस एवं अकाउंटिंग के प्रोफेसर भी हैं। दूसरी चर्चा, “सहयोग के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार संस्थानों का निर्माण” का संचालन डॉ. शालिनी सिंह ने किया, जो जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ में एडमिशन्स की चेयरपर्सन एवं मार्केटिंग की फैकल्टी सदस्य हैं।इसके बाद पुरस्कार और सम्मान कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां फैकल्टी सदस्यों को शिक्षण और शैक्षणिक नेतृत्व में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन और हाई टी के साथ हुआ।1945 में शुरू हुई जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की शैक्षणिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, ‘प्रणेता 2026’ व्यापक शैक्षणिक समुदाय के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का विस्तार करता है। लखनऊ में आयोजित पहले संस्करण में 20 कॉलेज और विश्वविद्यालय शामिल हुए थे, उसी श्रृंखला में वाराणसी के सम्मेलन ने संस्थान की प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाया है।
